मीडिया

डॉ• मनोहर प्रभाकर “स्मृति व्याख्यान ” का आयोजन

जयपुर 11जून

राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के पूर्व निदेशक, साहित्यकार, पत्रकार और जनसंचार विशेषज्ञ तथा पब्लिक रिलेशन्स सोसायटी ऑफ इण्डिया जयपुर चैप्टर के संस्थापक अध्यक्ष डॉ• मनोहर प्रभाकर की 6ठी पुण्य तिथि पर शनिवार को ” मीडिया परिदृश्य: कल, आज और कल ” विषय पर एक स्मृति व्याख्यान का आयोजन स्थानीय यूथ हॉस्टल में किया गया।

कार्यक्रम के आरम्भ में डॉ• प्रभाकर के चित्र पर सभी उपस्थित जनों द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की गई तथा उनके द्वारा रचित जनसम्पर्क गीत ” जन-जन से सम्पर्क बढ़ाने वाले हम ” का वादन हुआ।

पब्लिक रिलेशन्स सोसायटी ऑफ इंडिया जयपुर चैप्टर के अध्यक्ष श्री रविशंकर शर्मा ने अतिथियो का स्वागत किया तथा डॉ• प्रभाकर को श्रद्धांजली अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने पीआरएसआई जयपुर चैप्टर की स्थापना कर राजस्थान के जनसम्पर्क और मीडिया प्रोफेशनल्स को एकसूत्र में बांधा। उनके पदचिन्हों पर चलते हुए आज भी जयपुर चैप्टर की विकास यात्रा निरन्तर प्रगति पर गतिमान है।

मुख्य वक्ता, वरिष्ठ पत्रकार एवं हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति श्री सनी सेबेस्टियन ने स्मृति व्याख्यान के विषय ” मीडिया परिदृश्य: कल, आज और कल ” पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पत्रकारिता आज पहले से भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है। पत्रकारों को बहुत ही कठिन परिस्थितयों में अपनी सेवाएं देनी पड रही है। उन्हें अनेक प्रकार के दबाव झेलने पड रहे है। कोविड महामारी के कारण पत्रकारिता जगत पर बड़ा प्रभाव पडा है। समाचार पत्र की प्रसार संख्या में बहुत अधिक कमी आई। विज्ञापन की आय कम हो गई। अधिकतर पत्रकारों की नौकरियां चली गई। वर्क फ्राम होम की संस्कृति बढी है। टेलीविजन पर समाचार चैनलों की संख्या बहुत बढी है। ब्रेकिंग न्यूज के रुप में टेलीविजन और सोशियल मीडिया पर अविलंब सूचना/ समाचार मिल जाते है। उन्होंने समाचार एजेन्सियों की जगह ले ली है। अब समाचार पत्रों के डिजीटल संस्करण बढते जा रहे हो। सोशियल मीडिया पर सूचनाएं तुरन्त आ रही है हालांकि इस माध्यम की कोई जबावदेई नहीं है। उन्होंने कहा अच्छे समाचार और समाचार पत्र तभी उपलब्ध होंगे जब पाठक उनकी लागत वहन करने को तैयार होंगे अन्यथा तो वे विज्ञापनों की आय के कारण बाजार की शक्ति से प्रभावित होते रहेंगे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएएस, लेखक और समाजसेवी श्री राजेन्द्र भानावत ने की। उन्होंने कहा कि डॉ• मनोहर प्रभाकर जनसम्पर्क प्रोफेशनल्स के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत रहे। उनहोंने पत्रकारिता और लेखन का आदर्श स्वरुप हमारे सामने रखा। डॉ• प्रभाकर ने पीआरएसआई जयपुर चैप्टर की मजबूत नींव रखी जो निरंतर गतिशील है।

सेवानिवृत्त आईएएस श्री आई सी श्रीवास्तव ने कहा कि डॉ• प्रभाकर आदर्श जनसम्पर्ककर्मी और उच्चकोटि के साहित्यकार थे। सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ• दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने कहा कि डॉ• प्रभाकर बहुभाषाविद थे। लेखन में उपयुक्त शब्दों का चयन उनकी प्रमुख विशेषता थी।

सुविख्यात शिक्षाविद, चिंतक और लेखक डॉ• नरेन्द्र शर्मा ‘ कुसुम ‘ ने डॉ प्रभाकर के व्यक्तित्व और कृतित्व दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे मुख्य रूप से संवेदनशील कवि और रचनाकर्म थे जिन्होंने साहित्य की सभी विधाओं में श्रेष्ठ साहित्य का सृजन किया। वे राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में अपने सराहनीय दीर्घकालीन सेवाकाल में निदेशक के उच्चतम पद तक पहुंचे। राजकीय सेवा से निवृति उपरांत पत्रकारिता क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।

पीआरएसआई जयपुर चैप्टर के सचिव श्री देवीसिंह नरूका ने भी डॉ• प्रभाकर को श्रद्धांजली अर्पित की तथा अतिथिगण का आभार व्यक्त किया। प्रसिद्ध लेखक और रंगकर्मी अशोक राही ने कार्यक्रम का प्रभावी संचालन किया। कार्यक्रम में डॉ•मनोहर प्रभाकर के परिवारजन सहित अनेक साहित्यकार, पत्रकार, मीडिया व जनसम्पर्क प्रोफेशनल्स उपस्थित थे।

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