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लैंगिक समानता के लिए महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

लैंगिक समानता के लिए महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन जयपुर। पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग, गैर सरकारी संस्था अरावली, कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज और यूनिसेफ के सहयोग से सोमवार को लैंगिक समानता के लिए महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य राजनीतिक, आर्थिक और सार्वजनिक जीवन में निर्णय लेने के सभी स्तरों पर महिलाओं की प्रभावी भागीदारी एवं नेतृत्व के समान अवसर सुनिश्चित करना था।

इस अवसर पर राजस्थान सरकार की मुख्य सचिव उषा शर्मा ने सशक्तिकरण के लिए महिला पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज जमीनी स्तर पर बहुत बदलाव आए हैं। हालांकि हम अभी भी सरपंच पति और वार्ड पति जैसे नाम सुनते हैं। आज हमारे पास ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होंने समाज में परिवर्तन किए हैं और दूसरों के लिए पथ प्रदर्शक बनी हैं। हमें निर्वाचित प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों के बीच उचित समन्वय सुनिश्चित करने के लिए उनकी क्षमता का निर्माण करने की आवश्यकता है।

प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अरुणा रॉय ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि महिला प्रतिनिधियों के पास उचित कामकाज के लिए संवैधानिक, कानूनी और शासन के स्तर पर पूर्ण अधिकार हों। उन्होंने कहा कि उन्हें उचित ग्राम सभा बैठक आयोजित करने के ज्ञान से भी परिपूर्ण होना चाहिए, जिसमें उचित विचार-विमर्श और सभी की भागीदारी होनी चाहिए। यूनिसेफ राजस्थान की प्रमुख इसाबेल बार्डेम ने कहा कि राजस्थान में पंचायती राज में 50 प्रतिशत से अधिक महिला प्रतिनिधि हैं, जो यह बताता है कि महिलाएं अब उन वार्डों में भी जीत रही हैं, जो उनके लिए आरक्षित नहीं थे। यह उन प्रक्रियाओं और दृष्टिकोणों में निवेश करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है, जो शासन के सभी स्तरों विशेष रूप से पंचायती राज संस्थाओं में सक्रिय महिला नेताओं को आगे बढ़ाने के तरीकों की पहचान करने में सहायता कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि 1992 में संविधान के 73वें संशोधन में यह अनिवार्य किया गया है कि संसाधनों, उत्तरदायित्व और निर्णय लेने की शक्ति लोगों को उनकी निर्वाचित पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से जमीनी स्तर पर हस्तांतरित की जाए।

इस अवसर पर पंचायती राज सचिव नवीन जैन ने बताया कि राज्यभर से आने वाली महिला पंचायत नेताओं ने अपने समुदायों और क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। उन्होंने बताया कि पंचायती राज व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राजनीतिक शक्ति जमीनी स्तर तक पहुंचे। जैन ने कहा कि राजस्थान महिला सशक्तिकरण में सबसे आगे रहा है और हम इसके लिए आगे भी प्रयास करते रहेंगे। इस मौके पर विभिन्न विभागों के सरकारी अधिकारियों, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों और राज्यभर से निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों ने राजनीतिक व्यवस्था में महिलाओं की बड़ी भागीदारी के लिए अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि लैंगिक समानता के समग्र लक्ष्य में योगदान देने वाली राजनीतिक प्रक्रियाओं में महिलाओं की पूर्ण और सक्रिय भागीदारी को मजबूत करने के लिए वह हरसंभव प्रयास करेंगे।

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