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विद्याधर का बाग : जयपुर

vidyadhar-gardenपहाड़ी किलों, महलों, कुंजों, पुरानी हवेलियों और बाग-बगीचों के शहर जयपुर में इतिहास को भी संस्कृति की तरह संभाल कर रखा गया है। हर वह चीज जो जयपुर की प्राचीनता से जुड़ी है, उसका पूरा रख रखाव किया गया है। समय समय पर जययुर के परकोटा के महलों, मंदिरों, बाजारों और चौपड़ों का सौंदर्यकरण किया जाता है। इसका कारण जयपुर में प्रतिवर्ष लाखों की तादाद में देशी विदेशी पर्यटकों का पहुंचना है। जयपुर की खूबसूरती में विद्याधर का बाग भी चार चांद लगाता है।

विद्याधर भट्टाचार्या के नाम पर

विद्याधर का बाग जयपुर के बंगाली आर्किटेक्चर विद्याधर भट्टाचार्या को समर्पित है। महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय के शासनकाल में विद्याधर एक लिपिक था। यह बंगाली ब्राह्मण बहुत ही होनहार और कई विद्याओं का ज्ञाता था। वास्तु और शिल्प का उसे अच्छा ज्ञान था। उसी ने जयपुर को नौ खंडों में बनाने और वास्तु का पुट देने की सलाह दी। उसी की निगरानी में 1727 में आमेर रियासत के दक्षिण में एक भव्य और व्यवस्थित शहर बसाने की योजना को अमली जामा पहनाया गया। यह शहर था- जयपुर। विद्याधर के नाम से जयपुर में एक शानदार कॉलोनी भी बसाई गई है जिसे विद्याधरनगर के नाम से पुकारा जाता है। इस कॉलोनी को आप ’नई पिंकसिटी’ के रूप में देख सकते हैं।

विद्याधर का बाग : अवस्थिति और खूबसूरती

विद्याधर का बाग जयपुर शहर के पश्चिमी पहाड़ियों के बीच आगरा रोड पर स्थित है। जयपुर के प्राचीनतम उद्यानों में से यह एक है। इस उद्यान की पुरामहत्ता के कारण इसका संरक्षण कर आज भी इसे उसी रूप में रखा गया है, जिस रूप में इसका निर्माण हुआ था। शहर के 4-5 किमी की दूरी पर स्थित यह बाग जयपुर के वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्या की याद में बनाया गया था। विद्याधर के बाग का आकर्षण इसके पानी के फव्वारों, जलाशयों, फूलों की क्यारियों और व्यवस्थित दूब के मैदानों से और भी बढ़ जाता है। घाट की गूणी में बसा यह सुंदर उद्यान जयपुर की गौरवमयी और खूबसूरत संस्कृति का प्रतीक है। जयपुर के प्रसिद्ध शिल्प शास्त्र के आधार पर बना यह बाग सिसोदिया रानी के बाग के पास ही स्थित है। यह उद्यान समकालीन हिंदू और मुगल शैली में बना हुआ है। यहां की अद्भुत बनावट, सुंदर जलाशय, सीढीदार लॉन, फव्वारे और छतरियां सभी अपने शिल्प से प्रभाव उत्पन्न करते हैं। छतरियों और बरामदों की दीवारों पर भगवान कृष्ण के सुंदर चित्र बने हुए हैं जो बाग की शोभा को और बढ़ा देते हैं।

बाग की खूबसूरती दर्शनीय है। यहां के फव्वारों में भी कलात्मकता दिखाई देती है। पानी और चारों ओर हरी पहाड़ियों की मौजूदगी से बारिश के मौसम में यह बाग बहुत सुहाना नजर आता है और इसमें पर्यटकों की आवाजाही भी बढ जाती है। यहां कई दीर्घाएं भी बनाई गई हैं। बीच बीच में शाही छतरियां और भी ज्यादा प्रभाव पैदा करती हैं। पुरातन पद्धति से बनाए गए भित्तिचित्र फोटोग्राफी के प्रेमी पर्यटकों को बहुत लुभाते हैं। इसके साथ ही यहां बने जलाशय भी प्राकृतिक खूबसूरती को बढावा देते हैं। दीवारों और जालियों पर नक्काशी की तरह बारीक काम किया गया है। यह बाग हिंदू और मुगल शैलियां को शाही समागम नजर आता है। अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के कारण यह बाग पक्षियों को बहुत आकर्षित करता है। यहां अक्सर मोर, बुलबुल, सोनचिरैया और तोते बड़ी संख्या में देखे जा सकते हैं।

स्थल –  विद्याधर का बाग
खूबसूरती- छतरियां, जलाशय, सीढीदार लॉन, भित्तिचित्र, घाटीनुमा उद्यान।
नवीनीकरण- 1988
विजिट का समय – प्रतिदिन सुबह 8 से शाम 5.30
नजदीकी पर्यटन स्थल- सिसोदिया रानी का बाग, सिटी पैलेस, गलता, जंतरमंतर, जलमहल।

इतिहास

विद्याधर का बाग जयपुर के श्रेष्ठ संरक्षित उद्यानों में से एक है। यह जयपुर के वास्तुकार विद्याधर की याद में बनाया गया है। इस उद्यान का नवीनीकरण 1988 में किया गया और इसे मूल रूप दिया गया। विद्याधर को सच्ची श्रद्धांजलि और आदर देने के लिए ही इस बाग को प्राचीन भारतीय वास्तु और शिल्प शास्त्र के आधार पर ही हिंदू और मुगल स्थापत्य के आधार पर बनाया गया। इस उद्यान को दाख की बारी के नाम से भी जाना जाता है।

यह बाग जयपुर के लोकप्रिय दर्शनीय पर्यटन स्थलों में से एक है। इसके साथ साथ आगरा रोड पर गलता धाम, सिसोदिया रानी का बाग, घाट के बालाजी और चूलगिरी देवस्थान भी देखा जा सकता है।

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  • अब नहीं होगा यातायात जाम

    विद्याधर का बाग और सिसोदिया रानी का बाग देखने के लिए ट्रांसपोर्टनगर से आगरा रोड पर घाट की गूणी होते हुए जाया जाता है। यह मार्ग सकड़ा और घुमावदार होने के कारण यहां यातायात फंसा रहता था और अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती थी। इस कारण इस दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए इस मार्ग से जाने वाले पर्यटकों को ’इरिटेशन’ होता था। लेकिन अब जब से जयपुर में घाट की गूणी टनल से आगरा रोड पर आवाजाही होने लगी है तब से घाट की गूणी रोड बिल्कुल खाली सा रहता है और जाम लगने जैसी नौबत नहीं आती। तो अब गलता, विद्याधर का बाग, घाट के बालाजी, चूलगिरी या फिर सिसोदिया रानी का बाग बिना ’इरीटेशन’ के देखा जा सकता है।

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