जयपुर पर्यटन Hindi

लक्ष्मी जगदीश मंदिर, गोनेर

गोनेर का लक्ष्मी जगदीश मंदिर

छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध जयपुर शहर धर्म नगरी के नाम है। यह मंदिरों की नगरी है। यहाँ कोई मोहल्ला, कोई सड़क कोई चौराहा ऐसा नहीं है, जहाँ एक दो या कई मंदिर स्थापित न हो। जयपुर के प्रसिद्ध मंदिरों में, गणेश मंदिर, बिड़ला मंदिर, शिला देवी मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, राम मन्दिर, कूकस का साइ मन्दिर अन्य भी कई प्रसिद्ध है। जहाँ लोग अपनी आस्थानुसार दर्शन के लिए आते है। इन मंदिरों की अपनी अलग ही विशेषता है। इन मंदिरों में बनी मूर्तियों की छवि बड़ी ही निराली व आकर्षक हैं। इन मूर्तियों के दर्शनों से भक्तों को भगवान की छवि का आभास होता है। इन मंदिरों में प्रतिवर्ष मेले आयोजित होते है। जिसमें लाखों की संख्या में दर्शनार्थी दर्शनों के लिए आते है। विदेशी पर्यटक भी विशेष अवसरों पर यहाँ पर्यटन के लिए आते है और यहाँ की संस्कृति का ज्ञान प्राप्त करते है। जयपुर के मंदिरों में एक प्रसिद्ध मंदिर गोनेर का लक्ष्मीजगदीश मंदिर हैं। यह मंदिर अपने आप में एक अनोखा मंदिर है। यह जयपुर से लगभग 25 किलोमीटर दूर जयपुर-आगरा राजमार्ग पर पास स्थित है। इसे जयपुर की मथुरा भी कहा जाता है।
यह मंदिर अति प्राचीन मंदिर है और भव्य व कलात्मक है। इस मंदिर का प्रवेश द्वार संगमरमर से निर्मित है। मुख्य मण्डप में लक्ष्मी जगदीश की मूतियाँ स्थापित है। जिस चौकी पर मूर्तियों की स्थापना की गई है, उसके चारों ओर सुन्दर नक्काशी की गई हैं संगमरमर की चौखट पर बेल-बूटों के अलंकरण आकर्षित करते है। मुख्य मंडप की बनावट गुंबदनुमा है। मंडप के अन्दर की ओर कांच व अलंकरणों का बहुत ही सुन्दर काम किया गया है। जो देखने में बहुत ही आकर्षक लगता है। कांच पर विभिन्न रंगों के ज्यामितीय आकार व फूलों की आकृतियां बहुत ही सुन्दर लगती है। मंदिर में पिछले हिस्से की दीवार से इस मंदिर की प्राचीनता का अहसास होता है। सुरक्षा की दृष्टि से मंदिर को चूने आदि से लीप कर सपाट कर दिया गया है। इस मंदिर में जो मूर्ति है। वह मूर्ति एक खेत में से खोद कर निकाली गई है और इस मूर्ति को खोजने का श्रेय देवादास नामक ब्राह्यण को है। देवीय प्रेरणा से यह मूर्ति निकाली गई है। मान्यतानुसार अकबर ने आठ सौ बीघा जमीन मंदिर को खेती के लिए प्रदान की थी। इस मंदिर में प्रतिदिन शुद्ध घी से बना भोग लगाया जाता है। शाम के समय दूध का भोग लगाया जाता है।
जगदीश जी महाराज का जन्म दिवस महोत्सव ज्येष्ठ शुक्ला तृतीया को मनाया जाता है। इस मंदिर में पवित्रा एकादशी और विजयदशमी पर बड़ी धूम रहती है। यहाँ विभिन्न उत्सवों पर मेंलो का आयोजन भी किया जाता हैं। जैसे – फाल्गुन शुक्ला एकादशी, चैत्र कृष्णा द्वितीया तथा ‘सावन शुक्ला एकादशी’। इन अवसरों पर लाखों की संख्या में दर्शनार्थी दर्शनों का लाभ उठाते है। जयपुर के प्रसिद्ध मंदिरों में सबसे प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में चढ़ाये जाने वाले प्रसाद में देसी घी के मालपुए है।

Tags

About the author

Pinkcity.com

Our company deals with "Managing Reputations." We develop and research on Online Communication systems to understand and support clients, as well as try to influence their opinion and behavior. We own, several websites, which includes:
Travel Portals: Jaipur.org, Pinkcity.com, RajasthanPlus.com and much more
Oline Visitor's Tracking and Communication System: Chatwoo.com
Hosting Review and Recommender Systems: SiteGeek.com
Technology Magazines: Ananova.com
Hosting Services: Cpwebhosting.com
We offer our services, to businesses and voluntary organizations.
Our core skills are in developing and maintaining goodwill and understanding between an organization and its public. We also conduct research to find out the concerns and expectations of an organization's stakeholders.

Add Comment

Click here to post a comment

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Discover more from

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading