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जयपुर के बाजार

जयपुर के बाजार (Jaipur Market)

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महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने जब नया नगर बसाने की योजना पर अपने मंत्रीमण्डल के साथ अमल किया तो एक बात पर प्राथमिकता से विमर्श किया गया, वह थी जयपुर को युगों तक कैसे समृद्ध बनाए रखा जाए।

किसी भी नगर की समृद्धि उसके व्यापार और वाणिज्यिक गतिविधियों पर निर्भर करती है। महाराजा के कोषागार में लिपिक रह चुके युवा बंगाली वास्तुशास्त्री विघाधर भट्टाचार्य ने शहर को शिल्प शास्त्र के अनुरूप बसाने का मत रखा। इसमें सबसे अहम था नगर के मुख्य रास्तों के दोनो ओर बजार विकसित करना। विशेष बात यह थी उस समय यह शाही फरमान था कि मुख्य मार्गों पर किसी के निजी भवन का द्वार नहीं खुलेगा। मुख्य मार्गों पर सिर्फ सार्वजनिक इमारतों और दुकानों के द्वार खुलने का प्रावधान था, घरों के रास्ते गलियों में खोलने की हिदायत जारी की गई थी। परकोटा इलाके के मुख्य बाजारों में आज भी इस नियम का असर देखा जा सकता है। विघाधर भट्टाचार्य के सुझाव को सम्मान मिला। उन्होंने ही नगर को शिल्पशास्त्र के अनुसार बसाने का भी विचार रखा था। उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर राजा जयसिंह ने उन्हें मुख्य अभियंता नियुक्त किया और उन्हीं के बनाए नक्शे के अनुरूप जयपुर बसा। आखिर नगर नियोजन की अहम कड़ी साबित हुए यहां के बाजार। महाराजा के निर्देश पर ही देश प्रदेश से कुशल व्यापारियों, हस्तशिल्पियों, हुनरमंदों और कलात्मक वस्तुओं के निर्माताओं को इन बाजारों और इनसे सटी गलियों में बसाया गया। आज दुनियाभर में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मॉल संस्कृति पल्लवित हो रही है लेकिन जयपुर शहर के परकोटा बाजार का कोई मुकाबला नहीं। यहां का पूरा बाजार अपने आप में एक ऐतिहासिक मॉल है जिसमें खरीददारी करने का अनूठा रोमांच दुनियाभर के पर्यटक जानते, समझते और महसूस करते हैं। महाराजा जयसिंह और उनकी टीम की दूरदृष्टि का ही परिणाम है कि आज भी जयपुर शहर की समृद्धि की अहम कड़ी बने हुए हैं परकोटे के ये बाजार-

जौहरी बाजार

शहर का सबसे खूबसूरत और व्यस्त बाजार है जौहरी बाजार। बड़ी चौपड़ से सांगानेरी गेट के बीच स्थित इस बाजार में जौहरियों की दुकानें बहुतायत में हैं। यही कारण है कि इसे जौहरी बाजार के नाम से जाना जाता है। बाजार में स्वर्ण और रजत के आभूषणों के अलावा कीमती, अद्र्धकीमती और बेशकीमती रत्नों की खरीद-फरोख्त होती है। उल्लेखनीय है कि जयपुर को रत्न सिटी भी कहा जाता है। बाजार की खासियत है इन रत्नों की विशेष कटाई से युक्त हार, पेण्डल, झुमके, अंगूठियां, कंगन और इसके अलावा हीरे, पन्ने, माणक, मोती और रूबी जैसे स्टोन से सजे आभूषण। बाजार की कुंदनकारी दुनियाभर में मशहूर है। इसके साथ ही मीनाकारी का कार्य भी अपनी खास पहचान बनाए हुए है। बाजार के पूर्वी लेन पर देवड़ीजी का प्राचीन मंदिर है इसी के बाहर हर सुबह अर्धकीमती स्टोन और रत्नों की मण्डी लगती है जहां कीमती पत्थरों को दलालों के मार्फत खरीदा बेचा जाता है। स्टोन के बारे में बारीक जानकारी रखने वाले ही यहां एकत्र होते हैं और मोल-भाव करते हैं। बाजार में दूल्हा-दुल्हन के परिधान, साफों, ज्वैलरी और शादियों से संबंधित सामान की दुकानें भी हैं। जिन महिलाओं को राजस्थान की ट्रेडिशनल साडि़यों का क्रेज है वे जौहरी बाजार का दौरा बेहिचक कर सकती हैं। यहां लहरिया, बंधेज, जरी-गोटा और चिकनकारी से सजी खूबसूरत साडि़यां कई दुकानों पर उपलब्ध हैं जिनके फ्रेब्रिक और डिजाइन आंखों से दिल में उतर जाते हैं।

यहां चौपहिया वाहन से शॉपिंग करने से बेहतर है बरामदों में पैदल घूमकर खरीददारी का लुत्फ लेना। क्योंकि शहर का व्यस्ततम इलाका होने के कारण संभव है आपको अपना वाहन पार्क करने की जगह ना मिले। यहां बरामदों में चलते-चलते आप लक्ष्मी मिष्ठान भण्डार में लजीज व्यंजनों का स्वाद भी ले सकते हैं। वहीं गोपालजी का रास्ता पर लस्सीवाले से कुल्हड़ में ताजा लस्सी पीने का सुअवसर भी पा सकते हैं। इसके अलावा सांगानेरी गेट के टोर पर गन्ने के रस की बरसों पुरानी दुकान है जहां एक बरसों पुरानी दुकान है जहां एक गिलास गन्ने का रस पीकर आप तरोताजा महसूस करेंगे। बाजार के इसी छोर पर आमने-सामने हनुमानजी के दो मंदिर हैं। पूर्वमुखी हनुमानजी और पश्चिममुखी हनुमानजी। सांगानेरी गेट से आते और जाते सिर झुकाना अब परंपरा सी हो गई है।

साथ ही शहर की प्रमुख जामा मस्जिद भी जौहरी बाजार में हैं जहां मुस्लिम पर्वों पर अता की जाने वाली नमाज का नजारा अद्भुद होता है। बाजार की पश्चिमी लेन पर फलमण्डी और पूर्वी लेन पर सामने ही पुरानी सब्जीमण्डी है। अपनी मशहूर धुनों से लोगों की शादियों और सिनेमा के पर्दे पर कई बार रौनक बिखेर चुके जिया बैण्ड का ऑफिस भी जौहरी बाजार में ही है। बाजार में एटीएम की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

त्रिपोलिया बाजार

बड़ी चौपड़ से छोटी चौपड़ तक फैले बाजार को त्रिपोलिया बाजार कहते हैं। राजप्रासाद का दक्षिणी द्वार त्रिपोलिया गेट इसी बाजार में खुलता है। इस बाजार के बड़ी चौपड़ वाले कोने पुरोहितजी का कटला है। छोटी और पतली गलियों के जाल की तरह फैले इस कटले में तीज त्योंहार पर काम आने वाली वस्तुओं, दैनिक उपयोग की वस्तुओं, खिलौनों, प्लास्टिक के सामान, प्रसाधनों और स्टेशनरी की थोक की दुकाने हैं। शहर के आसपास के ग्रामीण इलाकों के  दुकानदार खरीददारी करने यहीं आते हैं। त्रिपोलिया बाजार पीतल, तांबे, एल्यूमीनियम और स्टील के बर्तनों की दुकानों के लिए प्रसिद्ध है। दीपावली के आसपास धनतेरस के दिन बाजार की रौनक देखते ही बनती है। बाजार में घडि़यों, ब्रांडेड जूतों, टिन की अलमारियों, मसालों, मावों, अचार, स्कूल और ट्यूरिस्ट बैग आदि सामानों की दुकानें हैं। इसके अलावा कुछ दुकानों पर यहां बही पंचांग और प्राचीन मंत्रों-ग्रंथों से जुड़ी पुस्तकें भी मिल जाती हैं। इसी बाजार में तस्वीरों को फ्रेम करने का कार्य भी किया जाता है। धातु की एंटीक चीजें पसंद करने वाले लोगों के लिए भी इस बाजार में सामान उपलब्ध है। बाजार में रामचंद्र ज्यूस वाले या बेसन के भजियों की पुरानी दुकान पर पेट पूजा भी की जा सकती है। साथ ही मोतीचूर के लड्डू और मिठाई की दो पुरानी दुकानें भी इस बाजार की पहचान हैं। यहां मेहताब बिहारीजी के मंदिर में डाकघर और श्रीजी की मोरी में बिजली विभाग का कार्यालय भी है। बाजार की रौनक है यहां दूर से दिखाई पड़ती ऊंची मीनार सरगासूली। त्रिपोलिया बाजार से लगते हुए अन्य मुख्य बाजार हैं आतिश मार्केट और चौड़ा रास्ता। हिन्द होटल और महाराजा मानसिंह पुस्तकालय इस बाजार की शोभा बढ़ाने वाली इमारतें हैं।

किशनपोल बाजार

छोटी चौपड़ और अजमेरी गेट के बीच स्थित है किशनपोल बाजार। जौहरी बाजार और त्रिपोलिया बाजार की तुलना में यह बाजार इतना समृद्ध नहीं लेकिन फिर भी महत्व रखता है। किशनपोल बाजार में वाद्ययंत्र एवं पेंटिंग से संबंधित सामान सुगमता से मिल सकता है। इसके अलावा कुछ स्पोर्ट्स की दुकानें भी हैं। आमतौर पर किराना, पंसारी, मसाले और सुपारी की दुकानें यहां बहुतायत से देखी जा सकती हैं लेकिन साईकिलों और फर्नीचर की दुकानें यहां प्रमुखता से मिल जाती हैं। बड़ी साईकिलों के अलावा बच्चों की साईकिलें और खिलौना गाडियों की दुकानें मशहूर हैं। इसके साथ ही चमड़े और रेगजीन के पर्स, सूटकेस, अलमारियां, टिन के बक्से, पल्म्बरिंग का सामान भी उपलब्ध है। किशनपोल बाजार में प्लास्टिक की कुर्सियां और घर का फर्नीचर भी सुलभता और सस्ती कीमत पर मिल जाता है। बाजार की प्रमुख विशेषत है यहां स्थित फाइन आर्ट कॉलेज। यही कारण है कि यहां पेंटिंग और हस्तकला से जुड़ी बहुत सी चीजें कई दुकानों पर उपलब्ध हो जाती हैं। किशनपोल बाजार में सरकारी गर्ल्स स्कूल होने से स्टेशनरी की भी कुछ दुकानें विकसित हो गई हैं।

चांदपोल बाजार

छोटी चौपड़ से चांदपोल गेट के बीच चांदपोल बाजार है। यहां घी, तेल, शर्बत, अचार तथा मसालों की दुकानों के साथ-साथ रेडीमेड वस्त्रों की दुकानें बड़ी संख्या में हैं। इसके अलावा यहां फुटपाथ पर कई प्रकार के मसालों की थडियां भी लगती हैं जहां काफी बरसों से मसाला कूटने वाले मसालची लोग खुला मसाला बेचते हैं। बाजार के दोनो ओर कई धर्मशालाएं और रेस्टोरेंट हैं। बहुत पुराने समय से इस बाजार की उत्तरी लेन की दुकानों के ऊपर नगरवधुओं की कोठियां भी हैं। इसी बाजार के दक्षिणी इलाके में संगमरमर की मूर्तियां बनाने का कलात्मक कार्य होता है। इसलिए चांदपोल बाजार में कुछ दुकानें मूर्तियों तथा हस्तकला उत्पादों की भी देखी जा सकती हैं। इसके अलावा बाजार में कुछ महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल भी हैं। इनमें सबसे प्रमुख है चांदपोल गेट स्थित चांदपोल हनुमानजी का मंदिर। कहा जाता है मंदिर में प्रतिष्ठित प्रतिमा राजा मानसिंह लेकर आए थे। इसके अलावा रामचंद्रजी का भव्य मंदिर और शनिदेव का मंदिर भी यहां दिखाई देते हैं। हर शनिवार खेजड़े के विशाल पेड़ के नीचे प्रतिष्ठित शनिदेव की मूर्ति पर तैलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है।

हवामहल बाजार

जब जयपुर बसा तब इसे नौ वर्गाकार खण्डों में बसाया गया था। इनमें से दो खण्ड राजमहल के लिए आरक्षित थे। शेष में बाजार और आवासों का निर्माण किया गया। चूंकि हवामहल रोड इन्हीं दो खण्डों के एक भाग से सटा हुआ है इसलिए नक्शे के तहत यहां बाजार विकसित नहीं था। लेकिन रोड पर बसे महल के सेवकों ने कालान्तर में यहां छोटी-मोटी दुकानें विकसित कर ली थी। बड़ी चौपड़ से चांदी की टकसाल तक फैले बाजार को हवामहल बाजार कहते हैं। इस रोड पर हवामहल, भट्ट राजा की हवेली, मंदिर श्रीरामचंद्रजी, कल्कि मंदिर, पुरानी विधानसभा, सिरहड्योढी दरवाजा, रामप्रकाश सिनेमा, शिमला होटल और काले हनुमानजी का मंदिर आदि ऐतिहासिक और पुरामहत्व की इमारते हैं। देशी विदेशी पर्यटकों का सर्वप्रिय इलाका यही है। विदेशी पर्यटकों की दिल्ली से आने वाली बसें सुबह के समय अधिकांशत: यहीं रूकती हैं इसलिए हवामहल के ठीक सामने करेंसी एक्सचेंज की सुविधा भी है। हवामहल रोड पर एंटीक वस्तुओं की कई दुकानें हैं इनमें पीतल, तांबे और लकड़ी की आकर्षक सजावटी वस्तुएं पर्यटकों का मन लुभाती हैं। हवामहल के पास ही हथियारों की धार तेज करने और तलवारें बनाने की एक प्राचीन दुकान है। यहां राजस्थान के ट्रेडिशनल परिधान, पोशाकें और आभूषणों के साथ साथ पर्स, मोजडि़यां यानि चमड़े की जूतियां व अन्य जरूरतों का सजावटी सामान मिल जाता है। इसी इलाके में जयपुरी रजाईयों की भी दुकानें हैं। कादर बक्ष की एक पुरानी दुकान पर जयपुर की मशहूर 100 ग्राम रूई की रजाईयां खरीदी जा सकती है। सिरहड्योढी दरवाजे के पास मोनालिजा आर्ट गैलरी पर हस्तनिर्मित दुर्लभ पेंटिंग और आर्ट मिल सकती है। इसी रोड पर जयपुर रियासत के प्रधानमंत्री रहे मिर्जा इस्माइल के प्रयासों से एक रंगमंच को सिनेमा का रूप दिया गया था और वह था रामप्रकाश सिनेमा। अपने समय का कौतुहल रहा यह सिनेमा हॉल आजकल बंद है और खण्डहर होने के कगार पर है। इसी के ठीक सामने जयपुर का ऐतिहासिक शिमला हॉटल भी है जिसकी इमारत आगंतुकों का ध्यान आकर्षित करती है। यहां के गुप्ता कॉलेज परिसर में रोजगार कार्यालय और रामचंद्रजी के मंदिर में देवस्थान विभाग के कार्यालय हैं। ट्रांसपोर्ट कंपनियों के ऑफिस और पटाखों की दुकानें भी इस बाजार की पहचान हैं और यदि आपको आपके वाहन पर नंबर या नाम लिखाना है तो यहीं आपको पेंटर्स की छोटी दुकानें भी मिल जाएंगी। भट्टों की गली के मोड पर महिला थाना भी है। सिरहड्योढी का विशाल दरवाजा राजमहल में प्रविष्ट होने का प्रथम द्वार है। यह द्वार जलेब चौक, जंतर मंतर, सिटी पैलेस और गोविंददेवजी मंदिर पहुंचाता है। बाजार के अंतिम छोर पर काले हनुमानजी का प्रसिद्ध मंदिर है। यदि आप हवामहल रोड का भ्रमण कर रहे हैं तो पंडितजी की कुल्फी, शर्मा वाले की लस्सी या कैलाश भोजनालय पर सस्ते और लजीज व्यंजनों का लुत्फ ले सकते हैं। शिमला होटल के पास ही एसबीबीजे बैंक की शाखा और एटीएम भी हैं।

चौड़ा रास्ता

त्रिपोलिया गेट से न्यू गेट के बीच स्थित है चौड़ा रास्ता। यह जौहरी बाजार के समानांतर है।

चौड़ा रास्ता के कोने पर सवाई मानसिंह लाईब्रेरी और दूसरे छोर पर गोलेछा सिनेमा है। इस बाजार की प्रमुख पहचान है पब्लिशिंग हाउस और पुस्तकों की दुकानें। यहां आपको स्कूल कॉलेजों की किताबों के अलावा आपका प्रिय साहित्य भी मिल जाएगा। पब्लिशिंग का कार्य बहुतायत से होने के कारण यहां प्रिंटिंग प्रेस की सैकड़ों दुकानें हैं। इसके अलावा पेन, रबर स्टाम्प, सरकारी व प्राईवेट कार्यालयों में काम आने वाले विभिन्न फार्म और रजिस्टर, फोटो कॉपी, लेमिनेशन, पेंटिंग के सामान की बहुत सी दुकानें मिल जाएंगी। इसके अलावा चौड़ा रास्ता में घडियों और चश्मों के बहुत से शोरूम हैं जहां आपको ब्रांडेड घडियां, दीवार घडि़यां नजर व धूप के स्टाइलिश चश्मे मिल जाएंगे। बाजार में गोलेछा सिनेमा के सामने ही फिल्म कॉलोनी है जहां दवाईयों का कारोबार होता है। बाजार में एसबीआई बैंक और कई अन्य बैंकों के एटीएम हैं। यहां प्रसिद्ध ताड़केश्वर महादेव का मंदिर है जहां सावन भर मेले जैसा माहौल रहता है। इसके अलावा राधादामोदरजी, गोवर्धनजी, साईं बाबा के मंदिर हैं जहां भक्तों का तांता लगा रहता है। इसी बाजार में शंकरवाले की प्रसिद्ध नमकीन मिलती है तो मधुर रस के नाम से गन्ने का ज्यूस भी। चौड़े रास्ते में फुटपाथ पर मिट्टी के बर्तनों और खिलौनों की दुकान भी दिखाई देती है जिसपर मिट्टी से बने बर्तन, खिलौने, गमले, झूमर और अन्य सजावटी सामान की खूबसूरती देखकर राहगीर ठिठकने पर मजबूर हो जाते हैं। चौडे रास्ते से लगी गली लालजी सांड का रास्ता में महिला परिधानों की दुकानें फल फूल रही हैं। इस बाजार की खूबसूरती से मोहित होकर अनेक टीवी सीरियलों और फिल्मों के कुछ अंश यहां फिल्माए जा चुके हैं। संकरी गली और रंग बिरंगे परिधानों से अटा बाजार कैमरे में क्लिक करने पर और भी खूबसूरत लगता है। गोलेछा सिनेमा के परिसर में ही रेस्टोरेंट पर आप जायकेदार व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं।

बापू बाजार, नेहरू बाजार, इंदिरा बाजार

घाट गेट से तोपखाना देश तक फैले आडे बाजार भी जयपुर शहर के मुख्य बाजारों में शामिल हैं। घाटगेट से सांगानेरी गेट के बीच संजय बाजार, सांगानेरी गेट से न्यू गेट के बीच बापू बाजार, न्यूगेट से अजमेरी गेट के बीच नेहरू बाजार और अजमेरी गेट से तोपखानादेश के किनारे तक इंदिरा बाजार स्थित हैं। इन चारों बाजारों में सबसे प्रमुख और समृद्ध बाजार है बापू बाजार। महिलाओं को ये बाजार खासा आकर्षित करता है। क्योंकि इस बाजार में महिलाओं की पसंद और प्रसाधन का लगभग हर सामान सुगमता से मिल जाता है। इनमें सांगानेरी और बगरू प्रिंट के वस्त्र, बेस, दुल्हन परिधान, साड़ी, सूट, हैण्डबैग, चूडियां, जूतियां, सेण्डल, घडियां, जींस टॉप और मॉर्डन लुक के महिला परिधान शामिल हैं। सौन्दर्य प्रसाधनों की दुकानों की भी इस बाजार में कमी नहीं। बापू बाजार में लड़कियों और महिलाओं की बड़ी संख्या में आवाजाही के कारण यहां कई छोटे मोटे व्यवसाय भी पनप गए हैं जैसे ब्यूटी पार्ल्स, मेंहदी लगाना, चाट व आईसक्रीम की दुकानें व फलाहार। सरावगी मेंशन के परिसर में स्थित फलाहार कॉर्नर पर व्रत में ग्रहण करने योग्य अल्पाहार मिल जाता है। यहां की साबूदाने की खिचड़ी का महिलाओं में खासा क्रेज है। बापू बाजार में लेडीज टेलर्स, फ्रेमिंग, हैण्डलूम, आर्टीफीशियल ज्वैलरी, मीठी सुपारियों की दुकानें भी महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखती हैं। यहां सांगानेरी गेट के कोने पर स्थित गन्ने के ज्यूस की पुरानी दुकान भी आगंतुकों का ताजा रस से स्वागत करती है।

न्यू गेट से अजमेरी गेट के बीच स्थित नेहरू बाजार में मुख्य रूप से इलैक्ट्रिकल आईटम की दुकानें हैं। इसके अलावा इस बाजार में जेंट्स के लिए कटपीस कपड़े, सूट और टेलर्स की दुकानें हैं। इंदिरा बाजार अजमेरी गेट से तोपखाना तक फैला है। इस इलाके में बच्चों और बड़ों के लिए रेडीमेड कपड़ों की दुकानें बड़ी तादाद में हैं। साथ ही मोबाईल फोन व उपकरणों की दुकानें भी हैं। यहां एक छोटा और संकडा बाजार परकोटे की प्राचीर के साथ लगा हुआ है जिसमें दुपहिया वाहनों के सामान व सर्विसिंग का काम होता है।

संजय बाजार घाट गेट से सांगानेरी गेट तक फैला है। इस बाजार में शनिवार को हटवाड़ा लगता है और कुछ दुकानें लोहे और टिन के सामान की हैं। यह बाजार पूरी तरह विकसित नहीं है।

परकोटे के अन्य बाजार और गलियां

जयपुर शहर के परकोटा इलाके के ये मुख्य बाजार थे। इनके अलावा परकोटे की गली गली किसी खास वस्तु की उपलब्धता के लिए जानी जाती है। जयपुर के अन्य बाजारों में बड़ी चौपड़ से रामगंज चौपड़ के बीच रामगंज बाजार है इस बाजार में चांदी के आभूषणों, पान-ठेलों के सामान, जूते, जूतियां, कुर्ते पायजामे, गर्म मसालों, मांसाहारी भोजनालयों, उर्दू की पुस्तकों, कपड़ों, मनिहारी, खिलौनों, क्रोकरी, प्लास्टिक के सामान, हैण्डलूम आदि की दुकानें हैं। इसी बाजार से लगते दड़ा मार्केट में महिलाओं, बच्चों के परिधान और सौन्दर्य प्रसाधनों की सैंकड़ों छोटी-छोटी दुकानें हैं।

रामगंज चौपड़ से उत्तर में चार दरवाजा और दक्षिण में घाटगेट के बीच फैले बाजार में अधिकांशत: लोहे के खिड़की दरवाजे, भवन निर्माण मेटेरियल, पलंग कुर्सियां, अलमारियां और बक्से बनाने का कार्य होता है। सुभाष चौक इलाके में बेकरी, इलैक्ट्रिकल्स, पेंट व रंग रोगन, दुपहिया वाहन सर्विसिंग, प्लंबरिंग, मेडिकल्स आदि की दुकानें हैं। इस इलाके में अचरोल हाउस में आपको बेशकीमती कालीन भी मिल सकते हैं। यहां सवाई रामसिंह के समय के रंगीन और शाही डिजाईन के कालीन विदेशी सैलानियों के लिए खास आकर्षण की होते हैं।

इसके अलावा नाहरगढ़ रोड और गणगौरी बाजार में महिलाओं के प्रसाधनों, आर्टीफीशियल ज्वैलरी, मनिहारी, क्रॉकरी, संगीत और वाद्ययंत्र, दुपट्टे, जरी-गोटे, हैण्डलूम, जूट बांस और प्लास्टिक से बने घरेलू उपकरण आदि बहुतायत से मिलते हैं। इसके अलावा यह बाजार कॉस्मेटिक्स और ज्वैलरी के थोक बाजार के रूप में भी पहचाना जाता है।

शहर की गलियों में भी छोटे छोटे बाजार पनपे हुए हैं। यहां की गलियां वस्तु विशेष की उपलब्धता के लिए विख्यात हैं। इनमें चांदपोल बाजार में भिण्डों का रास्ता, खजाने वालों का रास्ता, कल्याणजी का रास्ता और बाबा हरिश्चंद्र मार्ग में संगमरमर की मूर्तियां, जौहरी बाजार में घी वालों का रास्ता, हल्दियों का रास्ता और गोपालजी का रास्ता में घी, पनीर, मसाले, सुपारी, कीमती और अर्धकीमती नगीने, हवामहल रोड पर ख्वासजी का रास्ता में शेरवानी व साफे तथा भीतरी इलाकों हांडीपुरा व मेहरों की नदी में मिट्टी के बर्तन, पतंगें, मल्होत्रा की गली में बेडशीट, पिलोकवर और परदे, सुभाष चौक के पास पन्नीगरान मोहल्ला में सोने और चांदी के वर्क, रामगंज के फूटा खुर्रा गली में कीमती कलर्ड स्टोन के टुकडे़, कोली बस्ती में कालीन, त्रिपोलिया के मनिहारों का रास्ता में लाख व कांच की चूडि़यां, ठठेरों का रास्ता में तांबा, पीतल और धातु के बर्तन, चौडा रास्ता की तेलीपाडा गली में जूते व सेंडलें आदि वस्तुएं सुलभता से मिल जाती हैं। इसके अलावा त्रिपोलिया बाजार से ही लगे आतिश मार्केट में खिड़कियो, दरवाजों, पानी की टंकिंयों, फाईबर शीट, बाथरूम टॉयलेट मैटेरियल व प्लंबरिंग का सामान मिलता है, साथ ही फर्नीचर में इस्तेमाल होने वाला शीशा और शीशे की कटिंग की दुकानें भी हैं। जयपुर शहर में परकोटे के बाहर भी बहुत समृद्ध बाजार विकसित हुए हैं, इनमें एमआई रोड सबसे प्रमुख है। इस बाजार की रौनक देखते ही बनती है। बाजार में अंतर्राष्ट्रीय उत्पादों के भव्य शोरूम हैं। वहीं संसारचंद्र रोड, राजापार्क, आदर्शनगर, मालवीय नगर, टोंक रोड, विद्याधरनगर आदि इलाकों के मार्केट भी अपनी खास पहचान रखते हैं।

कब और कैसे घूमें

जयपुर के बाजारों में घूमने का मजा ही अलग है। लेकिन अगर आप बाहर से आए हैं और जयपुर के बारे में अपरिचित हैं तो आपको कुछ जानकारियां होना जरूरी है। सबसे पहले सबसे आवश्यक बात ये कि रविवार के दिन अधिकांशत: ये बाजार बंद रहते हैं। कुछ बाजार का कुछ हिस्सा मंगलवार को भी बंद रहता है। बाजार में यदि आप खरीददारी करना चाहते हैं तो बाजार के खुलने और बंद होने का समय भी आपको पता होना चाहिए। जयपुर के बाजार सुबह 11 बजे तक खुलते हैं और रात्रि 8 बजे तक बंद हो जाते हैं। परकोटा इलाके के इन बाजारों में भारी गहमागहमी होती है। इसलिए हो सकता है आपको आपके चौपहिया वाहन पार्क करने की जगह ना मिले। अगर आप चौपहिया वाहन लेकर यहां आए हैं तो सिटी पैलेस के जलेब चौक में वाहन पार्क कर बाजारों में घूमने का आनंद ले सकते हैं। जयपुर के ये प्राचीन बाजार एक दूसरे से जुड़े और नजदीक ही हैं इसलिए यहां बरामदों में पैदल घूमकर शापिंग का मजा लिया जा सकता है। यातायात की सुविधाएं भी यहां प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। यहां बड़ी चौपड़ और छोटी चौपड़ पर टैक्सी स्टैण्ड हैं जहां से ऑटो मिल जाते हैं। इसके अलावा लॉ-फ्लोर बसें, प्राईवेट बसें भी यहां रात्रि 10 बजे तक उपलब्ध रहती हैं। बाजारों में फोटोग्राफी अथवा वीडियोग्राफी निशुल्क है लेकिन निजी संपत्तियों, हवेलियों, मंदिरों और इमारतों की फोटोग्राफी से पहले ऑथेंटिक परसन की अनुमति लेना ठीक रहेगा।

जयपुर के समृद्ध बाजार यहां के राजा-महाराजाओं की दूर-दृष्टि का परिणाम थे। जिस वास्तु से इन्हें बसाया गया वह निश्चय ही जयपुर के लिए भाग्यशाली साबित हुआ। आज जयपुर दुनिया के सबसे समृद्ध और महंगे शहरों की गिनती में आता है। उसका एक अहम कारण हैं यहां के ये बाजार जो दीपावली पर जब सजते हैं तो तो लगता है जैसे सारे शहर में आकाश से चमकते-दमकते माणक मोतियों की बारिश हो गई है। वाणिज्य और संस्कृति का ऐसा घुला-मिला स्वरूप दुनिया में अन्यत्र शायद की कहीं देखने को मिले।

आशीष मिश्रा
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