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सुरक्षा यानि “स्वमं की रक्षा”

“सुरक्षा”

सुरक्षा यानि “स्वमं की रक्षा” !!

Safety means "protecting oneself"पर क्या हम सच में स्वमं की सुरक्षा के लिए गंभीर हैं? गंभीरता तो छोड़िए क्या हम कभी इसके बारे में क्षण भर के लिए सोचते भी हैं? ऐसा प्रतीत तो नहीं होता की हम वाक़ई अपनी या दूसरों की सुरक्षा के प्रति तनिक भी चिंतित हैं ??
अभी दुनिया भर में कोरोना महामारी की दूसरी लहर चल रही हैं और कारण हैं हम सब की घोर “लापरवाही” हैं ना?
पिछले वर्ष जब ये शुरू हुई थी तो हमें पता नहीं था कि क्या सही हैं क्या ग़लत पर वक़्त के साथ हमें यह भी पता चल गया था कि अग़र हम अपने रोज़मर्रा के व्यवहार में थोड़ा सा परिवर्तन कर लें जैसे “मास्क” ठीक से पहन ले, एक दूसरे से थोड़ी “दूरी” बनाकर रखें, “साफ़ सफाई” का ध्यान रख लें, अपने ही “हाँथो को साफ़” रखें तो हम इस महामारी से ख़ुद को और दूसरों को भी बचा सकते हैं पर हमने क्या किया.. जैसे जैसे इस श्रृंखला में कमी आने लगी और वैक्सीन लगनी शुरू हुई, हम फिर अपने पुराने लापरवाह ढ़र्रे पर उतर आये।
जब तक शादियों में.. मेलों में.. चुनावी सभाओं में ख़ूब भीड़ ना हो हमे लगता ही नहीं की कोई कार्यक्रम हुआ हैं..

ज़ीवन की “सुरक्षा” से ज्यादा “दिखावा” ज़रूरी हैं.. हैं ना ?

हाल ही में फेसबुक पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक बीएम्डब्ल्यू कार के चालक को ट्रैफिक पुलिस के जवान ने मोबाइल फ़ोन पर बात करते हुए वाहन चलाने के जुर्म में रोक लिया.. तो उन महानुभाव का ईगो इतना बड़ा हो गया और वो इतने आश्चर्यचकित थे कि आख़िर इतनी बड़ी और महंगी गाड़ी के मालिक को ट्रैफिक पुलिस के जवान ने रोक कैसे लिया? इससे पहले तो उन्हें किसी ने कभी रोका नहीं था.. फिर वो बार-बार और हरसंभव प्रयास में लगे रहे की उनका चालान ना हो.. उनके मुताबिक़ मोबाइल फोन पर बात करते हुए गाड़ी चलाना कोई बड़ा कारण नहीं हैं जिसके लिए उनका चालान किया जाये? उन महानुभाव को पता भी नहीं हैं कि इस देश की सड़कों पर इन्ही तरह के सामान्य जुर्म वाले कारणों की वजह से 400 लोग रोज़ाना अपने घर वापस नहीं पहुँच पाते हैं। इन सामान्य से जुर्म जैसे लाल बत्ती को लांघना, गलत साइड से ओवरटेक करना, नशा करके गाड़ी चलाना, तेज़ रफ़्तार में वाहन को सड़क पर चलाने के बजाय उड़ाना इत्यादि इत्यादि.. पर हमें इससे क्या? जब तक की हम या हमारा कोई इन “सामान्य कारणों” की वजह से दुर्घटना का शिकार न हो जाये या कभी घर ही वापस ना आये.. हम क्यों सुरक्षा के प्रति गम्भीर होंगे? हम क्यों सुरक्षा नियमों की पालना करेंगे? हम क्यों “सीट बेल्ट” या एक गुणवत्ता वाला “हेलमेट” पहनेंगे? हम क्यों गाड़ी को “गति सीमा” में चलाएंगे? वो तो सरकार का काम हैं.. वो आये और बचाये हमें.. कभी कोरोना से.. कभी सड़क दुर्घटनाओं से.. कभी पोलियो से.. कभी मलेरिया से..इत्यादि इत्यादि.. और हम ख़ुद किसकी सुरक्षा करेंगे? हम करेंगे अपने मोबाइल की, अपने अभिमान की, अपने टशन की, अपने दिखावे की इत्यादि इत्यादि.. हैं ना?

अग़र ऊपर लिखी हुई सच्चाई को बदलना हैं तो आप “समाधान” का हिस्सा बनिए वरना “समस्या” तो आप पहले से ही बने हुए हैं.. हैं ना?

सुरक्षा एक नारा नहीं हैं ये जीवन जीने का एक तरीका हैं..

अब यह आप पर सिर्फ “आप” पर हैं कि आप इस तरीके को अपनाकर समाधान बनना चाहते हैं या नहीं…

सुरक्षित रहें स्वस्थ रहें, इसी शुभकामना के साथ 🙏🙏

प्रेरणा की कलम से ✍️✍️

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