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ड्राइवर्स – सुरक्षित सफ़र के “सारथी”

दोस्तों आज से मैं आप सबसे एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने जा रही हूँ। जैसा की ज्यादातर लोग जानते हैं कि मैं करीब दो दशक से सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही हूँ.. तो ज़ाहिर हैं इस दौरान मेरा संपर्क विभिन्न प्रकार के वाहन चालकों से हुआ हैं और उनमें से कुछ ने मेरे दिल को छुआ हैं। ज्यादातर व्यवसायिक वाहन चालकों ने जैसे टेक्सी/बस/ट्रक ड्राइवर्स ने।

आप सोच रहें होंगे की इसमें इतना महत्वपूर्ण क्या हैं? बिल्कुल हैं दोस्तों.. चलिये आज मैं आपको मिलवाती हूँ श्री संजय झा जी से, जिनसे मेरी मुलाक़ात पिछले सप्ताह रांची, झारखण्ड में ही हुई थी। अधेड़ उम्र के सरल व्यक्ति संजय जी मेरे टेक्सी ड्राइवर थे जो मुझे रांची से करीब 300 किलोमीटर दूर देवगढ़ ले गए थे मेरे आराध्य बाबा भोलेनाथ के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा बैधनाथ जी महाराज के दर्शन करवाने के लिए..

अब आप सोच रहें होंगे की इसमें भी क्या विशेष हैं? यह तो टैक्सी ड्राइवर का काम होता हैं कि सवारी को उसके गंतव्य तक पहुंचाए। बिल्कुल सही सोच रहें हैं आप पर अगर सवारी एक अकेली महिला हो वह भी दूसरे राज्य की और रास्ता अत्यन्त ख़तरनाक एवं असुरक्षित हो और पहुँचते हुए रात भी हो जाये तो क्या कहेंगे आप?

परन्तु संजय जी ने मुझे एक पल भी ये एहसास नहीं होने दिया बल्कि उन्होंने मेरे द्वारा निर्देशित सड़क सुरक्षा नियमों की पालना करते हुए गाड़ी को सुरक्षित गति बनाते हुए ही मुझे अपने गंतव्य तक पहुंचा दिया.. यहां यह बताना सबसे महत्वपूर्ण हैं कि उन्हें अचानक सूचना देकर मेरे पास भेजा गया था जिससे वो दिन का भोजन नहीं कर पाए थे, मैंने उन्हें रास्ते में कहा भी की वो कहीं रुक कर भोजन या चाय नाश्ता कर सकते हैं। मेरे आग्रह को उन्होंने सिर्फ सर हिलाकर हाँ कह तो दिया परंतु वो कहीं भी नहीं रुके। उन्होंने रात को देवगढ़ पहुँच कर ही भोजन किया।

दूसरे दिन हम दर्शन करके वापस रांची पहुंचे तब उन्होंने मुझे बताया कि वो मेरी सुरक्षा को लेकर अत्यन्त जागरूक थे और इसीलिए उन्होंने जाते वक़्त खाना खाने के लिए कहीं भी वाहन नहीं रोका था क्योंकि वो मेरी “सुरक्षा” की दृष्टि से उचित नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर एक दिन मैं एक वक्त का भोजन ना भी करूँ पर आपको सुरक्षित यात्रा करवाके ले आया हूँ तो इससे बड़ा और कुछ नहीं हो सकता था। मैं हमेशा इसके लिए उनकी “शुक्रगुज़ार” रहूंगी।

हालाँकि मैं हमेशा अपनी सुरक्षा को लेकर जागरूक रहती हूँ पर शायद उस दिन मैं अपने भोले बाबा के दर्शनों को लेकर इतनी ज्यादा उत्सुक थी की मैं रास्ते की असुरक्षा को देख नहीं पाई परंतु अगर आपके वाहन का सारथी श्री संजय झा जी जैसे हो तो असुरक्षित यात्रा भी एक खूबसूरत सुरक्षित सफ़ल यात्रा में परिवर्तित हो जाती हैं।

तो दोस्तों आप भी जब ऐसे किसी “सारथी” के संपर्क में आये तो उनका दिल से धन्यवाद जरूर दीजियेगा… याद रखिये भगवन श्रीकृष्ण भी अर्जून के “सारथी” थे जिनकी वजह से अर्जून ने महाभारत को जीता था।

मिलेंगे एक और “सारथी” से अगले सफ़र में.. तब तक
सुरक्षित रहिये स्वस्थ रहिये।

प्रेरणा की क़लम से ✍️✍️

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