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श्राद्ध पक्ष में खली कौओ की कमी

श्राद्ध चल रहे हैं। लोग अपने पूर्वजों को याद करने के लिए तर्पण कर रहे हैं। यही वो दिन होते हैं जब कौओं की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि कौओं के जरिए ही अपने पूर्वजों से सम्पर्क साधा जाता है। इसीलिए श्राद्धों का भोजन उन्हें कराया जाता है। वहीं इन दिनों पारीस्थितिक तंत्र बिगडऩे से कौओं की कमी आई है। अब आम तौर पर मुंडेर पर कांव कांव करता कौआ देखने को नहीं मिलता। वहीं इसी बीच चिडिय़ा घर में कौओं का आतंक है।  जयपुर चिडिय़ाघर में बसे हिरणों पर कौओं का आतंक मंडराता रहता है। अपनी मासूमियत से लोगों का दिल जीतने वाले ये वन्य जीव कौओं की चोंच का शिकार बन रहे हैं।


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