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हँसता हुआ नूरानी चेहरा

हँसता हुआ नूरानी चेहरा 😊😊

वर्ष 2020 सबके जीवन में कुछ विशेष स्थान जरूर रखेगा तो ऐसा कैसे हो सकता है कि मेरे जीवन में कुछ #खास ना हो?

तो क्या खास हुआ है मेरे जीवन में.. अगर मैं कहूँ की मेरी जिंदगी पूरी तरह से बदल गयी है और यह छः महीने बहुत #सुखद अनुभव एवं आश्चर्यचकित करने वाले रहे तो कोई अतिश्योक्ति ना होगी।

अब मन में यह सवाल उठना लाज़िमी है कि पूरी दुनिया तो कोरोना महामारी से जूझ रही है .. सब तरफ इतनी बैचेनी का माहौल है तो मेरे लिए क्या सुखद हुआ है??
तो जवाब बहुत सरल है कि इन छः महीनों में मैंने अपने आप को आंतरिक गहराई तक जाना.. खुद की खुद से ही मुलाक़ात हो गयी और अपने बारे में कई अनजाने छुपे हुए राज़ पर से पर्दा उठ गया और यक़ीन मानिये यह एक खूबसूरत एवं आश्चर्यचकित करने वाला अनुभव ही है..

तो अब मन में यह उत्सुकता आ रही होगी की ऐसा मैंने अपने बारे में क्या जान लिया.. हम्म.. तो मैंने अपने सही रूप एवं गुणों को पहचान लिया और यह भी की जब भी मुझे इस दुनिया से आज्ञा लेने का समय आएगा तो मैं किस रूप में याद किया जाना पसंद करुँगी..

वैसे तो पिछले इकतालीस वसंतो में इस दुनिया के अलग अलग हिस्सों के अनगिनत लोगों से मुलाकात हुई.. उनमें से कई लोगों ने मेरे शारीरिक रूप से लेकर आत्मिक रूप एवं गुणों को कई तरह के नामों से परिभाषित करने की कोशिश की.. जैसे उदहारण के लिये मेरी दादी के लिए मैं #ग्यारसीमाई (निर्जला ग्यारस को जन्म होने के कारण), घर वालों के लिए #ट्विंकल – ऐ लिटिल स्टार, मम्मी के लिए #कालीबिल्ली, दुनिया के लिए #प्रेरणा, तो किसी के लिए #खोजीपत्रकार #प्रेरणा-दी इंस्पिरेशन, #मोटी #मटकी #बुलडोज़र #नाटी #छुपारुस्तम #बिगबॉस #सेंटाक्लोस #फलोंकीदुकान #रूडी #लड़ाकू #ज्ञानीबाबा #खुशक़िस्मत इत्यादि इत्यादि…

“ईश्वर की हर एक कृति खूबसूरत होती है और शारीरिक सुंदरता से ज्यादा मानसिक सुंदरता अहम होती है”… पर खुद को जो मैंने जाना है तो ऊपर वर्णित सभी उपाधियां मुझे बहुत पसंद है और सच भी है क्योंकि जिसकी जैसी नज़र उसे मैं उसी रूप एवं गुण में नज़र आई…

तो मैं खुद कोन हूँ?? इस सवाल का जवाब है #लाफिंगबुद्धा… जी हां.. मैं इस दुनिया से अलविदा इसी रूप में कहना चाहती हूँ.. “हँसते हुए नूरानी चेहरे के साथ”… जब सब तरफ खुशियाँ थी तब मैं भी खुश थी तो इसमें क्या खास था पर जब सब तरफ भय एवं तनाव का मौसम है जिससे मैं और मेरे परिवार भी संकट की स्तिथि में घिरे हुए हैं और तब भी मैं खुश हूँ .. खुल कर #हँस रही हूँ… संकट से लड़ने का #होंसला बना हुआ है.. जीत का #जज्बा मन में है… खुद पर पहले से ज्यादा #विश्वास है.. साथ ही असीमित नयी #संभावनाओं के द्वार खुल रहे है… पुराने रिश्ते नयी तरह से #मज़बूत हो रहे है… खुद की खुद से नयी #पहचान बन रही है… तो है ना यह सुखद अनुभव एवं आश्चर्यचकित होने वाली बात…

तो आप भी अपने आप से ज़रा मुलाकात करिए.. क्या पता आपको भी एक नयी संभावना की दस्तक़ हो जाये…

हँसते हुए को हँसाया तो क्या हँसाया किसी रोते हुए के लिए मुस्कराने की वजह तो बनिए… इन्ही पंक्तियों के साथ इज़ाज़त की “मैंने समुन्दर से सीखा है जीने का सलीका
चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना”

इस #खूबसूरत #जीवन के लिए #ईश्वर का #धन्यवाद् 🙏🙏😍😍

प्रेरणा की कलम से ✍️✍️


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