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जयपुर इंटरनेशन फिल्म फेस्टीवल – 5 (JFF – 5)

30 जनवरी से 3 फरवरी ( JFF – 5 )

जयपुर। जयपुर में पांचवां इंटरनेशन फिल्म फेस्टीवल होने जा रहा है। फेस्ट में 210 फिल्मों की स्क्रीनिंग होगी। 30 जनवरी से 3 फरवरी तक होने वाले इस आयोजन में फिल्मों की स्क्रीनिंग गोलेछा, गोलेछा ट्रेड सेंटर और चैंबर भवन में की जाएगी। फेस्ट में राजस्थान की 21 फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इनमें 13 फिल्में परदे पर और 8 डेस्कटॉप पर दिखाई जाएंगी। गौरव पंजवानी की चर्चित फिल्म ’सैकेंड मैरिज डॉट कॉम’ भी इसमें दिखाई जाएगी।

फेस्ट में ऑस्कर, कांस, बर्लिन और टोरेंटो फिल्म फेस्टीवल की बेहतरीन फिल्मों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। 21 दिसंबर को फिल्मों की तीसरी सूची जारी हुई जिसके अनुसार स्विटजरलैंड, स्पेन, ब्राजील, मॉरीशस, पेरू, श्रीलंका, इजराईल, सीरिया, अल्वेनिया, बुल्गारिया, तुर्किस्तान, मैक्सिको, ईरान, जापान और भारत की फिल्में शामिल हैं। फेस्टीवल में 49 फिल्में, 105 शॉर्ट फिल्में, 25 डॉक्यूमेंट्री और 31 एनीमेशन फिल्में प्रदर्शित की जाएंगी।

जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल

जयपुर में 30 जनवरी से ’जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल’ का पांचवा आयोजन होने जा रहा है। जयपुर लिटरेचर फेस्टीवल के तुरंत बाद होने वाले इस आयोजन में साल-दर-साल फिल्मप्रेमियों का जुड़ाव बढ़ता जा रहा है। इस फेस्टीवल के डायरेक्टर हनु रोज को पूरा श्रेय जाता है। उन्होंने लगातार जयपुर में यह आयोजन कर जयपुर को एक नजरिया दिया है। युवाओं के मन में सार्थक सिनेमा की एक जगह बना दी है। मसाला फिल्मों की टिकट के लिए टूट कर पड़ने वाला जयपुर यूथ सार्थक सिनेमा की ए बी सी डी भी समझता है और उसे सराहता है। जयपुर में इस आयोजन ने युवा फिल्मकारों, निर्देशकों को प्रोत्साहित किया है। साथ ही उन्हें फिल्मों की बारीकियां सीखने का अवसर भी मुहैया कराया है।

इस बार फेस्टीवल में

जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल में इस बार दुनिया का सार्थक सिनेमा स्क्रीन पर होगा। सार्थक सिनेमा को हम कला फिल्मों के रूप में जानते हैं। दरअसल आमिर खान और शाहरूख खान जैसे अभिनेता और निर्माता भी कला फिल्मों के कद्रदान हैं और अर्थपूर्ण सिनेमा गढ़ने का प्रयास भी करते हैं। आमिर की हाल ही रिलीज ’तलाश’ का फिल्मांकन कुछ हद तक अर्थपूर्ण सिनेमा की यादें ताजा करता है। इस बार फिल्मों के फेस्टीवल में थर्ड वल्र्ड की कला फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाएगी। थर्ड वल्र्ड में वे देश आते हैं जो विकासशील हैं और किसी न किसी समस्या से जूझ रहे हैं।

इंटरनेशनल सिनेमा

इस बार जययपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्ट में इन फिल्मों की स्क्रीनिंग होगी-
ईरान की बर्निंग नेस्ट, एस्टोनिया की एज टाइम गोज ऑन और बॉक्स्ड, कुर्दिस्तान की ए बायसिकल, हान्ड्रेस की क्राउन सीक्रेट, मोस्ट सीक्रेट और ईरान की द गोट सहित कुल तीस फिल्मों की इस दौरान स्क्रीनिंग की जाएगी। इन सभी फिल्मों को बल्रिन कांस, बुसान, और ऑस्कर जैसे फिल्म फेस्ट में सराहना मिल चुकी है। भारतीय फिल्म जलपरी भी इनमें शामिल है। इस फिल्म को कांस फिल्म फेस्टीवल में जूनियर किड ज्यूरी अवार्ड मिला था।

इन्होंने दिलाई पहचान

भारत में कला फिल्मों की शुरूआत पाथेर पांचाली और दो बीघा जमीन जैसी महान फिल्मों से हुई। इसके बाद नक्सली आंदोलन के दौरान मृणाल सेन ने बेहतरीन कला फिल्में गढ़ी। कला फिल्मों के ख्यातनाम चेहरे नसीरूद्दीन शाह, शबाना आजमी, ओम पुरी, पंकज कपूर, मिथुन चक्रवर्ती और दीप्ति नवल जैसे महान कलाकार हैं। इन सभी को हालांकि कमर्शियल फिल्मों से बहुत पैसा मिला लेकिन इनकी पहचान कला फिल्में ही थी, जिन्होंने इनके अभिनय को मांझ दिया।

कला फिल्में

कला फिल्मों की परिभाषा कभी कभी कम बजट और सिताराहीन फिल्मों से समझ ली जाती है। जबकि कला फिल्मों का अपना एक क्षेत्र और अपनी पहचान है। सिताराहीन होना और कम बजट में पूर्ण हो जाना इन फिल्मों की खासियत हो सकती है, कमजोरी नहीं। दरअसल कला फिल्में प्रस्तुतिकरण के सिनेमा माध्यम का प्रयोग समाज का असली चेहरा पूरी सच्चाई से उजागर करने का माद्दा रखती हैं। साथ ही खास बात ये कि इन फिल्मों में फंतासी का बिल्कुल प्रयोग नहीं किया जाता। न मेकअप। ना तड़क भड़क और ना ही अल्हड़ गीत संगीत। ये फिल्में समाज की समस्याओं को पूरे विश्वसनीय ढंग से पेश करती हैं। सूरज का सातवां घोड़ा और तमस भारतीय पृष्ठभूमि में बनी श्रेष्ठ कलाफिल्में हैं। ईराक, ईरान, क्यूबा, अर्जेन्टीना, अल्जीरिया जैसे देशों ने अपनी समस्याओं को ऐसी ही फिल्मों के माध्यम से दुनिया के सामने रखा।

जयपुर के लिए फायदा

जयपुर इंटरनेशनल फिल्म समारोह जैसे आयोजनों का लाभ जयपुर के युवा उठाते आए हैं। इस फेस्ट ने जयपुर में युवाओं को फिल्म निर्माण के लिए प्रेरित किया है। जयपुर में इस तरह की फिल्मों के प्रदर्शन से युवा पीढी को थर्ड वर्ड सिनेमा का पहचानने का मौका मिलेगा। युवा पीढी भी देश की समस्याओं की ओर ध्यान देगी और समस्या आधारित फिल्में बनाएगी।


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