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जयपुर मेट्रो

मेट्रो (Jaipur Metro) ट्रैक अपडेट

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Jaipur Metro Rail Corporation Limited

Khanij Bhavan,
Behind Udyog Bhavan,
C-Scheme,
Jaipur- 302005

[tab: Contact Details]

Tel. No. : 0141-2385790, 0141-2385791
Mob. No. : –

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तकनीक और सुविधा के स्तर पर जयपुर के वर्ल्ड क्लास सिटी बनने की दिशा में जयपुर मेट्रो एक खास कदम होगा। राज्य में गहलोत सरकार के लिए भी मेट्रो नाम की नैया की सहारे जल्दी ही होने वाले विधानसभा चुनावों की नदी पार करना चाहेगी। देश के लिए भी यह एक खास कदम होगा क्योंकि जयपुर की मेट्रो सिर्फ ढाई साल में सबसे एडवांस तकनीक से बनकर तैयार है। दुनिया के लिए भी यह परीक्षा की घड़ी होगी क्योंकि इस ट्रेन में छह देशों की तकनीक इस्तेमाल की गई है। इसमें जर्मनी से हैवी इंजीनियरिंग का फार्मुला लिया गया है तो चेक रिपब्लिक, जापान, कोरिया और आस्ट्रेलिया के एक्सपर्ट्स ने भी भूमिका निभाई है।

जयपुर मेट्रो का निर्माण बैंगलोर की भारत अर्थ मूवर्स लिमि कंपनी में हो रहा है। यहां सौ से अधिक इंजीनियर्स और लगभग 14 सौ वर्कर मेट्रो के कोच के निर्माण में जुटे हैं। मेट्रो के 40 कोच के लिए 320 करोड रुपए खर्च किए जा रहे हैं यानि एक कोच पर करीब 8 करोड रुपए खर्च हो रहे हैं। जयपुर मेट्रो की एक रेल 32 करोड रुपए की होगी। इनमें से सबसे ज्यादा पैसा स्टील, बोगी, वायरिंग और कांच पर खर्च हुआ है।

बीईएमएल ने जयपुर मेट्रो के कोच के लिए न केवल दुनिया के टॉप लीडर्स से रॉ मेटेरियल खरीदा है बल्कि इसके लिए कोरिया भेजकर करीब 140 इंजीनियरों को ट्रेंड भी कराया है। जयपुर मेट्रो के  लिए कोरिया, जापान, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, यूके और चेक रिपब्लिक से रॉ मेटेरियल खरीदा गया है। जयपुर की मेट्रो में 1230 यात्रियों की क्षमता होगी। एक ट्रेन में दो मोटर कार और दो ड्राइविंग ट्रेलर कार होंगे। एक मोटर कार में 340 और ड्राइविंग ट्रेलर कार मिें 315 लोग एक बार में सफर कर पाएंगे। जयपुर मेट्रो को 95 किमी  प्रति घंटा की रफ्तार के हिसाब से डिजाइन किया गया है।  लेकिन जयपुर में एक स्टेशन की दूसरे स्टेशन से दूरी एक किमी से भी कम है इसलिए इसकी ऑपरेशनल स्पीड 55 किमी प्रति घंटे के हिसाब से ही होगी।

जयपुर मेट्रो को भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड के सीजीएम बीएल मंजूनाथ के साथ जीएम शास्त्री, डीजीएम के प्रकाश, डीजीएम के सी शशिकांत, डीजीएम रमेश के एम की की टीम ने थीम दी है। इसके लिए टीम ने  दुनिया सहित हमारे  देश की सभी मेट्रो रेलों का अध्ययन किया। इसके बाद अब तक की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल इस रेल में किया गया है।

मेट्रो के काम में देश के महारथी इंजीनियर लगे हुए हैं। इनमें स्टील वॉल्स यूनिट मैनेजर जी मुरली मोहने, कोच साइड वॉल्स यूनिट मैनेजर प्रसन्ना व शंकर रेड्डी, इंजीनियर पैनल यूनिट मैनेजर मधुसूदन सहित सौ से अधिक इंजीनियर लगे हुए हैं।

प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल पिछले दिनों बेंगलुरू स्थित बीईएमएल गए थे। वहां उन्होंने जयपुर पिंक थीम से रेल के अगले हिस्सो को डिजाइन करने का विचार रखा। कई विशेषज्ञों से उन्होंने जयपुर के हेरिटेज लुक पर डिजाइन तैयार कराए। इसके बाद बेंगलुरू में इसे फाइनल किया गया। यानि रेल के अगले हिस्से में हेरिटेज लुक देता डिजाइन होगा। कोच पर पिंक लाइन भी होगी।

जयपुर मेट्रो के सीएमडी एनसी गोयल का कहना है कि बीईएमएल ने रेल को जो रूप दिया है उससे जयपुर मेट्रो सबसे अलग होगी। जयपुर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डीएमआरसी अतुल गाडगिल का कहना है कि पहली रेल के कोच बेंगलुरू से 15 मई तक जयपुर पहुंचने की उम्मीद है। यहां सभी कोच को एसेम्बल कर रेल के रूप में शुरूआती ट्रायल किया जाएगा।

तैयार ट्रेन शेल्टर में लगी पटरियों पर रखी है। इसके एक एक कोच को ट्रैक्टर से खींचकर बाहर लाया जाएगा। बडे ट्रेलर पर क्रेन की सहायता से चढाया जाएगा। प्रक्रिया छह मिनट की होगी। इसके बाद ट्रेलर को जयपुर के लिए रवाना किया जाएगा। यह ट्रेलर 15 से 17 दिन में जयपुर पहुंच जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि पहली रेल के चार कोच 15 मई के आसपास जयपुर पहुंच जाएंगे।

जयपुर मेट्रो के निर्माण में मुख्य रूप से कोरिया की तकनीक का इस्तमाल किया गया है। इसके अलावा कई देशों की सामूहिक तकनीक में जो भी सर्वश्रेष्ठ है, उसको इस्तेमाल बीईएमएल के इंजिनियरों ने यहां किया है।

जयपुर मेट्रो की विशेषताएं-

हादसों से बचने के लिए उच्च तकनीक-
इस रेल में हादसों से बचने के लिए कॉलिजन बीम का इस्तेमाल किया गया है। इसमें आमने सामने भिड़ने की स्थिति में हादसे की गंभीरता को टालने की क्षमता है। यदि ट्रैक पर दो रेलें आमने सामने भिड भी गई तो पटरी से नहीं उतरेंगी। बल्कि एक दूसरे से चिपक जाएंगी। ऐसे में काफी हद तक जनहानि से बचा जा सकेगा।

विकलांगों का खयाल-
जयपुर मेट्रो के ड्राइवर ट्रेलर में आगे और पीछे की ओर दो दो सीटों का इंतजाम किया गया है। ये गेट में प्रवेश के साथ ही लगी हैं। ये सीटें फोरसीटर हैं।

सीसीटीवी कैमरे और कंट्रोल सिस्टम-
जयपुर मेट्रो के हर कोच के गेटों के दोनो ओर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इनका कंट्रोल ट्रेन ऑपरेटर के पास रहेगा। इससे  इसके जरिए यात्रियों पर भी नजर रखी जा सकेगी।

ऑटोमेटिक ट्रेन ऑपरेटिंग सिस्टम-
मेट्रो में ऑटोमेटिक ट्रेन ऑपरेटिंग सिस्टम होगा। देा ऑपरेटर होंगे। जो सिस्टम पर निगरानी  रखेंगे। पूरा कंट्रोल डिपो स्थित कंट्रोल रूम व ऑपरेटर के पास रहेगा।

इको फ्रेंडली और पावर सेविंग-
जयपुर मेट्रो इको फ्रेंडली है। इसमें पावर की खपत भी कम होगी। पावर  जेनरेशन के उपकरण भी लगाए गए हैं। विमान की तरह ही मेट्रो पूरी तरह साउंड प्रूफ होगी। इको फ्रेंडली दिल्ली मेट्रो के कारण दिल्लीका प्रदूषण स्तर साल में 6.30 लाख टन कम हुआ था। दिल्ली को 47 करोड कार्बन क्रेडिट के रूप में मिले।

स्मोकिंग पर  अलार्म-
जयपुर मेट्रो को टॉक्सिक फ्री बनाया गया है। यहां  स्मोकिंग करते ही अलार्म बजेगा। जिससे तुरंत ही होने वाली हलचल से ट्रेन रुक जाएगी और स्मोकर को पकड़ा जा सकेगा।

फायर फाइटर्स व सेंसर-
जयपुर मेट्रो में आग लगने की आशंका नहीं रहेगी। जैसे हीकहीं जरा भी धुआं जैसी स्थिति बनेगी। फायर फाइटिंग सिस्टम काम करने लगेगा और आग पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।

लिफि्टंग डोर-
जयपुर मेट्रो के गेट लिफ्ट का काम करेंगे। जैसे ही कोई अवरोध दोनो गेटों के बीच आएगा। गेट खुल जाएंगे। यानि गेट में किसी यात्री के फंसने जैसी स्थिति नहीं बनेगी। उल्लेखनीय है दिल्ली में मेट्रो के गेट में फंसने से एक युवक की मौत हो गई थी। इस स्थिति से बचने के लिए लिफि्टंग डोर का इस्तेमाल किया गया है।

पब्लिक एड्रेसिंग सिस्टम-
जयपुर मेट्रो में विमानों की तरह रेल ऑपरेटर यात्रियों के बीच सूचनाएं अनाउंस कर सकेगा। ऑनलाइन पब्लिक एड्रेसिंग सिस्टम भी काम करेगा। इसमें ट्रेन कहां पहुंची, कौन सा स्टेशन छोड़ा, कौन सा आने वाला है, किस दिशा में आएगा,  यह सब जानकारी अनांउस लगातार की जाएगी।

इमरजेंसी कॉल के लिए फोन सुविधा-
जयपुर मेट्रो में यात्री सीट के पास आपातकालीन फोन सर्विस होगी। इससे यात्री सीधे ट्रेन ऑपरेटर से संपर्क कर सकेंगे। फोन के साथ कैमरा भी होगा ताकि ड्राइवर बात करने वाले को देख सके। लेकिन इस सेवा का उपयोग इमरजेंसी में ही किया जा सकेगा।

माउंटेड डिस्कब्रेक-
जयपुर मेट्रो में माउंटेड डिस्कब्रेक लगे हैं। इससे यात्रियों को गाडी चलने या रुकने पर झटके नहीं लगेंगे। नई तकनीक के ये व्हील माउंटेड डिस्कब्रेक के कारण पहिए बबलिंग नहीं करेंगे। इससे झटका नहीं लगेगा।

फास्ट पिकअप-
जयपुर मेट्रो का पिकअप दिल्ली मेट्रो से अधिक होगा। जयपुर मेट्रो में ’बोल्स्टर लेस बोगी’ होगी। यह सिस्टम 9 तरह के वाइब्रेशंस पी जाता है और ट्रेन की स्पीड बढाता है।

यात्रियों को लिए एलसीडी-
जयपुर मेट्रो में एलसीडी स्क्रीन लगी होगी। इन स्क्रीन्स पर आने वाले स्टेशन सहित शहर के बारे में अन्य जानकारियां भी दी जाएंगी। दिल्ली मेट्रो में यह सुविधा उपलब्ध नहीं  है।

स्टैण्डर्ड गेज पर चलेगी मेट्रो-
जयपुर मेट्रो स्टैंडर्ड गेज पर चलेगी। अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार स्टैण्डर्ड गेज पर रेल गति में रहकर भी नियंत्रित रहती है।

यहां भूमिगत होगी मेट्रो

अम्बाबाड़ी से सीतापुरा तक जाने वाले मेट्रो ट्रैक को अजमेरी गेट से सांगानेर पर भूमिगत रखने और एयरपोर्ट से जोड़ने की योजना पर विचार किया जा रहा है। प्लान के मुताबिक पानीपेच से यह ट्रैक अजमेरी गेट तक भूमिगत है और यहां से इसे सांगानेर तक एलीवेटेड बनाने की योजना थी, किंतु अब हो सकता है अजमेरी गेट से ही ट्रैक जमीन के अंदर ही बिछे। जयपुर मेट्रो को सांगानेर एयरपोर्ट से जोड़ने की तैयारी चल रही है। राज्य सरकार चाहती थी कि मेट्रो एयरपोर्ट से जुड़े प्रस्तावित रूट में सांगानेर के अंदर से होकर सीतापुरा की ओर मुड़ता था। नए रूट के अनुसार दुर्गापुरा, लक्ष्मीनगर, सांगानेर के बाद रूट एयरपोर्ट होकर सीतापुरा के लिए निकलेगा। दूसरे फेज में मेट्रो ट्रैक की लम्बाई लगभग 24 किमी है। यह ट्रैक अम्बाबाड़ी से सिंधी कैंप, अजमेरी गेट, नारायणसिंह सर्किल, गोपालपुरा, एयरपोर्ट होकर सीतापुरा निकलेगा। इस रूट पर 16 भूमिगत स्टेशन और 4 एलिवेटेड स्टेशन होंगे। इससे पूर्व इस रूट को एलीवेटेड बनाने की योजना थी और उसी पर कार्य आरंभ भी हो चुका था। इस कार्य पर लगभग 20 करोड का खर्च भी हुआ। एलीवेटेड ट्रैक बनाने के लिए पिलर्स खड़े किए गए। लेकिन अब नए प्लान के लिए सर्वे किया जा रहा हैं, इसके तहत यह ट्रैक भूमिगत होगा।

जयपुर मेट्रो में नहीं होंगे जयपुर के प्रतीक

जयपुर के मानसरोवर से रेल्वे स्टेशन के मेट्रो रेल भले ही जुलाई में शुरू हो जाए लेकिन जयपुर मेट्रो में अभी जयपुर के प्रतीक नजर नहीं आएंगे। शुरूआती एक डेड माह तक लोग जयपुर मेट्रो के लिए बनवाए गए विशेष कोच में नहीं बल्कि डीएमआरसी के कोचों में सवारी करेंगे। इसलिए न तो कोच पर गुलाबी रंग की पट्टी दिखेगी और न ही महलों और किलों के चित्र दिखाई देंगे। जयपुर मेट्रो के लिए कोच निर्माण का जिम्मा बेंगलुरू स्थित बीईएमएल को दिया गया है। जहां 10 ट्रेनों के 40 कोच निर्माणाधीन हैं। मानसरोवर से चांदपोल तक मेट्रो कोरीडोर के निर्माण की सुस्त चाल और कोचों के निर्धारित शेड्यूल की बजाय देरी से  पहुंचने के कारण अब सरकार ने पहले दिल्ली मेट्रो की तीन ट्रेन मंगाकर मेट्रो चलाने का निर्णय किया है। पूर्व में बेंगलुरू 15 अप्रेल  तक दो ट्रेन के पहुंचने का कार्यक्रम था लेकिन अब मई तक  पहुंचेंगे। संचालन की शुरूआत में प्रत्येक स्टेशन पर 12 से 15 मिनट के अंतराल पर मेट्रो मिलेगी।

दिल्ली से तीन ट्रेन मंगाई जाएंगी। जयपुर मेट्रो की शुआत में चार चार कोच की दो रेल चलेंगी। एक रेल को आरक्षित रखा जाएगा। किसी रेल के खराब या रख रखाव के लिए संचालन रोकने पर उसको काम में लिया जाएगा।

मेट्रो ट्रेक पर नए कोच का व्यावसायिक संचालन करने से पहले रेलवे संरक्षा आयुक्त रेलवे बोर्ड  और डिजाइन एंड स्टेंडडर्स आर्गेनाइजेशन की स्वीकृति चाहिए। इस स्वीकृति के लिए कोचों का निर्धारित समयावधि तक ट्रायल व अन्य जांच जरूरी हैं। इस  प्रक्रिया में दो से तीन माह का समय लगता है। इस समय से बचने व जनता को जल्द से जल्द मेट्रो की सवारी कराने के लिए दिल्ली से डीएमआरसी के स्वीकृत कोच मंगाए जाएंगे। डीएमआरसी के कोच  सभी जांचों व स्वीकृति से प्रमाणित होंगे। बस इन्हें दिल्ली से जयपुर चलाने के लिए रेल्वे बोर्ड से अनुमति लेनी होगी।

जयपुर पुलिस करेगी मेट्रो की सुरक्षा

जयपुर मेट्रो की सुरक्षा की जिम्मेदारी शहर पुलिस के पास ही होगी। पुलिस के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने मेट्रो के लिए 633 कांस्टेबल भर्ती के लिए पुलिस मुख्यालय को निर्देश दिए हैं। यह भर्ती वर्तमान में चल रहे कांस्टेबल भर्ती में ही की जाएगी।
मेट्रो के 9 स्टेशन व रेलवे लाइन की सुरक्षा व्यवस्था के लिए जेएमआरसी ने सीआईएसएफ का जाप्ता लेने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। केंद्र सरकार ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि मेट्रो के लिए किसी भी राज्य को सीआईएसएफ का जाप्ता नहीं दिया गया। यह केवल दिल्ली मेट्रो की  सुरक्षा ही देख रही है। इसके बाद शहर पुलिस से जानकारी ली गई थी।

शहर पुलिस ने मेट्रो की सुरक्षा के लिए एक प्रपोजल भेजा था, जिसमें 787 पुलिसकर्मियों की आवश्यकता बताई थी। इसमें 633 कांस्टेबल शामिल हैं। सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मंजूरी के साथ ही मुख्यमंत्री ने 633 कांस्टेबलों की भर्ती के आदेश भी जारी कर दिए हैं। प्रदेश में पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती चल रही है। सभी जिलों में लिखित परीक्षा हो चुकी है। कईजिलों में परिणाम आने के बाद शारीरिक दक्षता आरंभ हो गई है। जयपुर शहर का परिणाम अभी नहीं आया है। इस आदेश के बाद अब जो परिणाम आएगा उसमें 633 पद अतिरिक्त शामिल होंगे।
मेट्रो सुरक्षा के जाप्ते में एक डीसीपी, एक एडिशनल डीसीपी, एक एसीपी, 3 इंस्पेक्टर, 11 सब इंस्पेक्टर, 37 असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर, 100 हैड कांस्टेबल और 633 कांस्टेबल होंगे।


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