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आभानेरी – शिल्प की स्वर्णनगरी

Abhaneri

Abhaneriकला और संस्कृति के क्षेत्र में भारत की भूमि का कोई मुकाबला नहीं। यहां पग-पग पर कला के रंग समय को भी यह इजाजत नहीं देते कि वे उसके अस्तित्व पर गर्त भी डाल सकें। भारत की ऐसी ही वैभवशाली और पर्याप्त समृद्ध स्थापत्य कला के नमूने कहीं कहीं इतिहास के झरोखे से झांकते मालूम होते हैं। ऐसे ही कुछ नमूने राजस्थान के दौसा जिले में स्थित ऐतिहासिक स्थल आभानेरी में देखने को मिलते हैं।

जैसा कि नाम से प्रतीत होता है आभानेरी इतिहास की आभा से अभीभूत कर देने वाला स्थान है। जयपुर आगरा रोड पर सिकंदरा कस्बे से कुछ किमी उत्तर दिशा में यह छोटा सा गांव किसी समय राजा भोज की विशाल रियासत की राजधानी रहा था। राजा भोज को राजा चांद या राजा चंद्र के नाम से भी जाना जाता है।
पुरातत्व विभाग को यहां से प्राप्त पुरावशेषों को देखकर यह कहा जा सकता है कि आभानेरी गांव तीन हजार साल पुराना तक हो सकता है। ऐसा माना जाता है कि यहां गुर्जर प्रतिहार राजा सम्राट मिहिर भोज ने शासन किया था। उन्हीं को राजा चांद के नाम से भी जाना जाता है। आभानेरी का वास्तविक नाम आभानगरी था। कालान्तर में अपभ्रंष के कारण यह आभानेरी कहलाने लगा।

Abhaneriराजा चांद ने यहां कई चमत्कृत कर देने वाले निर्माण कराए जिनके स्थापत्य की आभा तुर्क आक्रान्त सहन नहीं कर पाए और खूबसूरत शिल्पों के टुकडे टुकडे कर दिए। आज भी शिल्पविधा का चरम बयान करते इन टुकड़ों पर उत्कीर्ण मूर्तियां और बेल-बूटे एक साथ रूदन करते और हास करते नजर आते हैं। संयोग वियोग में भीगी यह कला रोती मालूम होती है क्योंकि इन्हें लूटपाट कर तोड़ा गया और हंसती इसलिए लगती हैं कि आज के वैज्ञानिक और यांत्रिक युग में मशीन से भी ऐसे शिल्प गढ़ना आसान नहीं है। इतिहास की कला और उथल-पुथल को बयान करती आभानेरी से प्राप्त कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण पुरावशेष अल्बर्ट हॉल म्यूजियम जयपुर की शोभा बढ़ा रहे हैं।

आभानेरी में आठवीं नवीं सदी में निर्मित दो स्मारक आज राष्ट्रीय धरोहर हैं। हर्षत माता का मंदिर और चांद बावड़ी।

आभानेरी उस समय राष्ट्रीय फलक पर उभरकर सामने आई जब यहां आसपास के क्षेत्र से तीसरी चौथी सदी के पुरावशेष पुरातत्व विभाग को प्राप्त हुए। उसके बाद यह स्थल विभाग ने अपने अधीन ले लिया। अब आभानेरी के हर्षत माता मंदिर और चांद बावड़ी राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक हैं। जयपुर दिल्ली आगरा गोल्डन ट्रायएंगल के बीच स्थित इस ऐतिहासिक स्थल पर दिनोंदिन विजिटर्स की संख्या बढ़ रही है।

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जयपुर-आगरा हाईवे और जयपुर के पास स्थित होने से आभानेरी को लाभ भी प्राप्त हुआ है। जयपुर से आभानेरी की दूरी लगभग 95 किमी है। यह जयपुर से आगरा की ओर चलने पर दौसा से आगे सिकंदरा कस्बे से उत्तर में लगभग 12 किमी की दूरी पर स्थित है।

आभानेरी वर्तमान में एक छोटा सा गांव है। ऐतिहासिक तथ्यों से यह जानकारी मिलती है कि क्षेत्र में नवीं सदी में राजा चांद का शासन था। ये वही राजा चांद थे जिन्होंने गुर्जर साम्राज्य पर राज किया था। शिल्प और स्थापत्य प्रेमी राजा चांद ने महत्वपूर्ण स्मारकों का निर्माण कराया। उस समय की निर्माण शैली पर दक्षिण की द्रविड़ शैली का प्रभाव साफ दिखाई देता है। अपने राजधानी आभानगरी में राजा चांद ने हर्षत माता का भव्य मंदिर और बावड़ी का निर्माण कराया।
आठवीं से नवीं सदी के बीच निर्मित चांद बावड़ी और हर्षत माता मंदिर अपनी पुरातन स्थापत्य शैली के कारण बेमिसाल इमारतें हैं। पूर्व की ओर झांकता हर्षत माता का मंदिर है और उसी के ठीक सामने है चांद बावड़ी।

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