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जयपुर नगर निगम

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जयपुर नगर निगम की स्थापना वर्ष 1904 में 74 वें नगर अधिनियम के तहत की गई थी। नगर निगम का मुख्य उद्देश्य शहर के सभी नागरिकों की जरूरतों के अनुसार कार्य करना है। पिंक सिटी के नाम से लोकप्रिय शहर जयपुर अपनी कला और वास्तुशिल्प के कारण दुनियाभर में जाना जाता है, यह खूबसूरत शहर अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के लिए भी प्रसिद्ध है। जयपुर भारत के प्रसिद्ध शहरों में से एक है, यह पर्यटन का एक महान केंद्र है। विश्व भर से यहां हर साल लाखों की संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं और शहर का स्थापत्य देखने के साथ साथ यहां की रंग बिरंगी संस्कृति में रंग जाते हैं।

पता-
जयपुर नगर निगम, यूनिवर्सिटी मोड़, लाल कोठी
टोंक रोड़ जयपुर, राजस्थान।

उक्त सभी बातों और विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए जयपुर नगर पालिका को नगर निगम में तब्दील किया गया था। तेजी से प्रसारित होते इस मेट्रो शहर के विकास और जनसुविधाओं के लिए एक मिशन की तरह काम करना जरूरी है। इनहीं मानकों को मद्देनजर रखते हुए नगर निगम अपनी स्थापना से लेकर आज तक इस खूबसूरत शहर में सुधार और नागरिक सेवाओं के कार्य में जुटा है।

अपने मकसद तक पहुंचने और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जयपुर नगर निगम ऐसे नए कार्यक्रमों और योजनाओं को अमल में लाता है जो सभी के लिए फायदेमंद हों और तेज रफ्तार से बढ़ती जनसंख्या की तेजी से बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो। जयपुर को एक वर्ल्डक्लास सिटी बनाने में नगर निगम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जयपुर नगर निगम शहर में जल, अपशिष्ट प्रबंधन, शिक्षा और स्वास्थ्य केन्द्रों के निर्माण के साथ साथ सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह शहर में सीवरेज के जाल और जल निकासी प्रणाली और शहर भर में स्वच्छता बनाए रखने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।

नगर निगम जयपुर शहर में राजमार्गों, सड़कों, फ्लाईओवर्स, उद्यानों आदि के रखरखाव के लिए कार्य करता है। इसके अलावा विभिन्न विकास परियोजनओं के निर्माण और क्रियान्वन में भी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करता है। नगर निगम नए बनने वाले भवनों के निर्माण पर नजर रखता है और यह देखता है कि वे सभी नियमों के दायरे में बन रहे हैं, इसके अलावा जर्जर हो चुके मकानों की निगरानी रखता है ताकि बारिश या भूकंप के समय जनहानि से बचा जा सके, निगम शहर में मनोरंजन केन्द्रों, सामुदायिक हॉल, उद्यान, सार्वजनिक पार्क, प्रदर्शनी हॉल और सम्मेलन केंद्र, इमारतों और अपार्टमेंट्स आदि के निर्माण और रखरखाव के रखरखाव के लिए जवाबदेह है।

नगर निगम सभी मुद्दों पर और अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करे, इसके लिए शहरो चार प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। जयपुर नगर निगम शहर के लिए बहुत ही बेहतर तरीके से प्रभावी कार्य करता है। शहर के लिए समर्पित होकर नागरिकों के लिए विकास और सुधार के कार्य करने के कारण अनेकों बार इस संगठन को सम्मानित और पुरस्कृत किया जा चुका है। जयपुर का नगर निगम देशभर के अन्य राज्यों के निगमों और परिषदों से श्रेष्ठ माना जाता है। यह विभाग नागरिकों के जन्म एवं मृत्यु रिकॉर्ड को  भी संरक्षित रखता है और प्रमाण पत्र प्रदान भी करता है।

जयपुर नगर निगम

नगर निगम के कार्य निष्पादन को देखते हुए जयपुर शहर को आठ प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है। ये आठ क्षेत्र इस प्रकार हैं-

  1. विद्याधर नगर- वार्ड संख्या 1, 8, 9,10,36,37 एवं 62 से 70
  2. मोती डुंगरी क्षेत्र के वार्ड 18 एवं 26 से 35
  3. सिविललाइंस क्षेत्र के वार्ड सं 2 से 7, 15, 16, 17, 19, 20 एवं 38
  4. हवामहल पूर्व क्षेत्र के वार्ड संख्या 44 से 51 एवं 55 से 57
  5. मानसरोवर क्षेत्र के वार्ड संख्या 11 से 14 एवं 21
  6. हवामहल पश्चिम क्षेत्र के वार्ड 39 से 43 एवं 58 से 61
  7. सांगानेर क्षेत्र के वार्ड 22 से 25
  8. आमेर क्षेत्र के वार्ड 52, 53 एवं 54 इनमें शामिल हैं।

जयपुर को एक हरा भरा और साफ सुथरा शहर बनाने के लिए जयपुर महापौर ज्योति खंडेलवाल ने साहसिक प्रयास किए हैं। इसके अलावा जनसमस्याओं के शीघ्र निस्तारण के लिए उन्होंने संचार तकनीक का भी बखूबी  इस्तेमाल किया है। जयपुर में सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाने के  लिए निगम की  ओर से ए टू जेड सर्विस  भी आरंभ की गई थी। लेकिन आशानुकूल परिणाम न देने के कारण सेवा हटा दी गई। वर्तमान में निगम जयपुर में बेहतर व्यवस्थाओं के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रहा है।

महत्वपूर्ण दूरभाष तालिका

श्रीमती ज्योति खंडेलवाल – (मेयर) -0141-2741424, फैक्स- 2741424
श्री जगरूप सिंह यादव – (सीईओ) – 0141- 2742823, फैक्स 2742823
श्री वीरेन्द्र सिंह- (आरएएस)- 0141-5101455
कंट्रोल रूम नम्बर- 0141-2742900
सिटीजन हैल्पलाइन नम्बर- 0141- 5110111


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