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#किवंदती या #आविष्कार

#विज्ञान के विद्यार्थी होने के फायदा यह होता है कि हम हर परिस्तिथि का आकलन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कर पाते है… समस्या के समाधान की खोज करते समय हर पहलू को परख सकते है, उसकी विवेचना कर सकते Kivandati or Inventionहैं…कभी कभी सोचती हूँ की भारतीय सनातन एवं पुरातन काल का दृष्टिकोण कितना वैज्ञानिक था.. लगभग सभी पौराणिक ग्रंथो में इस बात का जिक्र है कि शिवलोक या ब्रह्मलोक में जाने के लिए #विमान का उपयोग किया जाता है… रावण भी सीता मैया को विमान में ही तो लेकर गया था… तो सनातन संस्कृति ने तो हजारों वर्षों पूर्व ही विमान सेवा का #अविष्कार कर लिया था..

वर्तमान में कोरोना काल में सारे #तीर्थस्थल तालों में बंद हो गए.. ऐसे में सिर्फ एक छोटा सा जादुई डिब्बा जो की #मोबाइल फ़ोन के नाम से जाना पहचाना जाता है, सारे भगवानों के लाइव दर्शन करवा रहा है.. भक्तजन घर के अंदर बैठ कर मानसिक रूप से ही सभी देवी देवताओं की पूजा कर रहे हैं… #कार्तिक मास में वर्णित कई कहानियों में यह प्रचलित है कि भक्तों के पास छोटी डिबिया में सारे तीर्थ, नदियां, पेड़, भगवान् इत्यादि मौजूद होते थे जो भक्त के सामने प्रकट हो जाते थे, जिससे की भक्त घर पर ही सब तीर्थों के दर्शन एवं पूजन कर लेते थे… आज #स्मार्ट #मोबाइल फ़ोन #इन्टरनेट के माध्यम से प्रत्यक्ष घर बैठे सारे तीर्थ स्थलों की पूजा दर्शन करवा रहा है.. यह अविष्कार सनातन काल में किया जा चुका था जिसका आम जनता द्वारा भली भांति उपयोग भी किया जाता था…

तो अब आगे हम क्या अविष्कार पुनः कर सकते है जो की सनातन काल में उपयोग में लाया जाता था और वर्तमान में तो अत्यन्त आवश्यक हो गया है.. अगर आपने #महाभारत में वर्णित प्रसंग ध्यान से सुने होंगे तो आप यह अवश्य जानते होंगे की पांडवो को बारह वर्ष का देशनिकाला दिया गया था मतलब उनके पास कुछ भी नहीं बचा था जैसा आज के समय में लाखों करोड़ों लोगो का हाल हो गया है.. तब द्रोपदी ने सूर्य भगवान् को प्रसन्न करके एक #चरी (भोजन बनाने का एक पात्र) प्राप्त की थी जिसकी विशेषता थी की एक बार उसमें भोजन बनाने के बाद वो उस क्षेत्र के सभी मनुष्यों एवं जीव जंतुओं का पेट भरती थी और तब तक खाली नहीं होती थी जब तक भोजन पकाने वाली द्रोपदी स्वमं भोजन ना करले.. द्रोपदी रोज़ाना सभी प्रकार के जीव जंतुओं एवं मनुष्यों का पेट भरने के बाद ही भोजन करती थी..

जैसे #विमान एवं #मोबाइल सेवा का पुनः अविष्कार किया गया है, तो क्या हम इस चमत्कारी चरी का भी अविष्कार कर सकते है?? मेरे विचार में तो बिलकुल कर सकते हैं.. क्या पता अगली सदी में यह भी अस्तित्व में आ जाये.. जिस प्रकार हम अपनी #जनसँख्या बढ़ाते जा रहे है तो प्राकृतिक रूप से उपलब्ध भोजन तो कभी पूरा नहीं पड़ेगा तब आवश्यकता ही अविष्कार की जननी होगी..

हमारे सनातन काल की किवंदितियों में वर्तमान की प्रत्येक समस्या का समाधान छुपा हुआ है, जरुरत है हमारी वैज्ञानिक नज़र को विकसित करने की….

सुखद भविष्य की कामना के साथ, खुश रहें स्वस्थ रहें।।

प्रेरणा की कलम से ✍️✍️

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