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गांधी की 150वीं जयन्ती एचसीएम रीपा एवं आईएएस एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम

जयपुर, 18 नवम्बर। मुख्य सचिव श्री डी.बी. गुप्ता मंगलवार को यहां एचसीएम रीपा में प्रातः 10:45 बजे ’’गांधी एक सचित्र जीवनी’’के लेखक श्री प्रमोद कुमार द्वारा खादी पर उकेरी गई महात्मा गांधी की सचित्र जीवनी की प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। प्रदर्शनी उद्घाटन के बाद कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य सचिव श्री डी.बी. गुप्ता की उपस्थिति मेंपद्म श्रीडॉ. पुष्पेश पंत ’’गांधी एक सचित्र जीवनी’’के लेखक श्री प्रमोद कुमार से उनकी पुस्तक पर चर्चा करेंगे। यह जानकारी सोमवार को आईएएस एसोसिएशन की साहित्यिक सचिव श्रीमती मुग्धा सिन्हा ने दी।

श्रीमती सिन्हा ने बताया कि महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती वर्ष के उपलक्ष्य में आईएएस एसोसिएशन एवं एचसीएम रीपा के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। मंच पर एचसीएम रीपा के निदेशक आईएएस श्री अश्विनी भगत भी मौजूद रहेंगे। उन्होंने बताया कि मूल अंगे्रजी में लिखी गई पुस्तक ’’गांधी एन इलुस्टार्टेंड बायोग्राफी’’का हिन्दी, मराठी, डच, फ्रेंच, रशियन, जर्मन एवं इटालियन भाषा में अनुवाद भी हो चुका है।

उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी पर लिखी यह किताब एक शानदार दस्तावेज है। जिसमें गांधी के जीवन के विभिन्न पहलुओं का रोचक वर्णन तस्वीरों के साथ किया गया है। इसमें बचपन से लेकर अन्तिम समय तक की महत्वपूर्ण घटनाओं को शामिल करते हुए सरल भाषा में कम शब्दों में स्पष्ट तौर पर दर्शाया गया है। उन्होंने बताया कि पुस्तक को 6 भागों में बांटा गया है, पहला भाग-हिन्दुस्तान, इग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के शुरूआती वर्ष (1869 से 1914 तक) है।

श्रीमती सिन्हा ने बताया कि पुस्तक का द्वितीय भाग- हिन्दुस्तान वापसी, असहयोग आन्दोलन और स्वाधीनता का आह्वान (1915 से 1929), तृतीय भाग – नमक सत्याग्रह और गोलमेज सम्मेलन (1930-1939), चतुर्थ भाग- क्रिप्स मिशन और भारत छोड़ो आन्दोलन (1940 से 1946), पंचम भाग – सांप्रदायिक दंगे, विभाजन और आजादी (1946 से 1947) तथा षष्ठम भाग – हत्या और दाह संस्कार (1948) है। पुस्तक गांधी को एक शरारती, जिंदादिल लड़के से एक महात्मा के रूप में विकसित होने का अध्ययन है।

उन्होंने बताया कि लेखक ने क्रमबद्ध पाठ्य सामग्री और उनके साथ दिये गये छायाचित्र गांधी की अनूठी जटिलता को साकार करते है, उनकी सफलताओं और विफलताओं को, अपने समकालीनों के साथ उनके आत्मीय रिश्तों को और स्वयंम अपने परिवार के साथ रहे रिश्तों को भी बखूबी बताया गया है। पुस्तक मेें गांधी के क्रिकेट प्रेम का भी जिक्र किया गया है। लेखक ने पुस्तक में उन महिलाओं का भी वर्णन किया है जिन्होंने गांधी का अनुसरण किया।

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