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कनीराम नृसिंहदास टीबरेवाला हवेली : झुंझनूं

कनीराम नृसिंहदास टीबरेवाला हवेली : झुंझनूं (Kaniram Narsinghdas Tibrewal Haveli : Jhunjhunu)

Kaniram-Narsinghdas-Tibrewal-Haveli

राजस्थान एक विशाल राज्य है और इसके विभिन्न उपक्षत्रों को प्राचीन समय से ही अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इनमें शेवाखाटी, मेवाड़, मारवाड़, ढूंढाड़, मेवात, हाड़ौती आदि प्रमुख भाग शामिल हैं। शेखावाटी क्षेत्र में राजस्थान के सीकर, चुरू और झुंझनूं जिले आते हैं। प्रदेश का उत्तरी-मध्य हिस्सा शेखावाटी कहलाता है। यह क्षेत्र शुष्क मैदानी इलाका होने के कारण सर्दियों में बहुत ठंडा और गर्मियों में बहुत गर्म होता है। यहां वर्षा का औसत भी अन्य इलाकों से कम ही रहता है। लेकिन अपने गौरवमयी इतिहास और स्थापत्य से इस क्षेत्र ने सभी को हैरत में डाला है। खास बात ये कि शेखावाटी के उद्योगपति पूरे देश और दुनिया में अपना लोहा मनवा चुके हैं। सेठों को उपजाने वाले इस क्षेत्र में जगह-जगह पुराने व्यवसाइयों की हवेलियां अपनी खूबसूरत मौजूदगी से सभी का ध्यान आकर्षित करती हैं।

शेखावाटी शिल्प

शेखावाटी क्षेत्र अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और निर्माण के कारण राजस्थानी संस्कृति का महत्वपूर्ण अंश है। यह इलाका वीर राजपूत योद्धाओं द्वारा निर्मित और जीवनभर उनका पालन करने वाली मर्यादाओं व परंपराओं के लिए भी विख्यात रहा है। शेखावाटी क्षेत्र की हवेलियां बहुत प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा यहां के किले और प्राचीन भवननिर्माण शैली भी प्रभावित करती है।

शेखावाटी का इतिहास

झुंझनूं जिले की कनीराम नृसिंहदास टीबरेवाल हवेली राजस्थान की प्रसिद्ध हवेलियों में से एक है। झुंझनूं शेखावाटी इलाके के प्रमुख नगरों में सबसे महत्वपूर्ण है, शेखावाटी का मुख्यालय भी झुंझनूं ही है। जयपुर से झुंझनूं शहर लगभग 180 किमी की दूरी पर है। झुंझनूं नगर की स्थापना 15 वीं सदी के आस पास खेमखाणी नवाबों ने की थी। बाद में बाद में इस क्षेत्र पर राजपूतों का प्रभुत्व हो गया और 1730 में राजपूत सरदार सरदुल सिंह इस इलाके में सवोच्च शक्ति बनकर उभरे। शेखावत राजपूतों की बहुलता और प्रभाव के कारण इस क्षेत्र को शेखावाटी के नाम से जाना गया।

शानदार भित्तिचित्र

शेखावाटी क्षेत्र की भव्य हवेलियां इनकी दीवारों पर बने शानदार भित्तिचित्रों के लिए भी जानी जाती हैं। इन दीवारों पर भगवान कृष्ण की लीलाओं के भित्ति चित्रों के साथ साथ ऐसे चित्र भी मिलते हैं जो इतिहासकारों और पुरावेत्ताओं के लिए ऐतिहासिक सामग्री जुटाने में अहम स्थान रखते हैं। भित्ति चित्रों में स्थानीय राजपूत शासकों, उनके द्वारा लड़े गए युद्धों और राजपूत इतिहास से जुड़े अहम चरणों की जानकारी भी हवेलियों हर हिस्से में अंकित है। इसके अलावा सजावटी बेलबूटे और सुंदर कला के तौर पर भी ये भित्तिचित्र मशहूर हैं। ये भित्तिचित्र झुंझनूं के सामाजिक आर्थिक परिवर्तन और विकास के जटिल परिवर्तन को इंगित करते हैं। सभी चित्र मानो इतिहास की एक खिड़की जैसे हैं जिनमें से झांककर शेखावाटी के इतिहास और संस्कृति को समझने का प्रयास किया जा सकता है। इन पेंटिंगों में शेखावाटी की वीरता के साथ साथ उद्यम प्रेम को भी दर्शाया गया है। शेखावाटी के ये उद्यमी आरंभ से ही मेहनती और जोखिम उठाने में माहिर थे। इन सुंदर भित्तिचित्रों को अपने समय सोने की पॉलिश से संवारा गया था। इससे इन हवेलियों के मालिकों की समृद्धि का पता चलता है।

हवेली : इतिहास और खूबसूरती

इस प्राचीन और भव्य हवेली का निर्माण झुंझनूं के एक प्रसिद्ध व्यापारी नृसिंहदास टीबरेवाल ने 1883 में करवाया था। झुंझनूं में टीबरेवाल क्षेत्र व्यापारियों की सघनता के कारण विख्यात था। उन्नीसवीं सदी के मध्य में शेखावाटी के ज्यादातर व्यापारी अपना कारोबार बढ़ाने के लिए कलकत्ता और पूर्वी क्षेत्रों में चले गए। वहां उन्होंने अपनी पहचान मारवाड़ी उद्योगपतियों के रूप में बनाई। पहचान के साथ साथ उनकी साख भी बढ़ी और वे स्थायी रूप से दूसरे राज्यों या विदेशों में बस गए। तब से ये हवेलियां सरकार के संरक्षण में आ गई।
झुंझनू की कनीराम नृसिंहदास टीबरेवाल हवेली सहित अन्य सभी हवेलियां इतिहास की शानदार कारीगरी और स्थापत्य का अद्भुत नमूना हैं। दूसरे स्थानों पर कारोबार बढ़ने के बाद या तो व्यापारियों ने इन्हें बेच दिया या फिर ताले जड़कर हमेशा के लिए चले गए। जिन हवेलियों का कोई दावेदार नहीं बचा उन्हें सरकार ने अपने अधीन ले लिया। कुछ हवेलियों को होटलों में तब्दील कर दिया गया।
टीबरेवाल हवेली की दीवारों पर उकेरित बेलबूटों पर सोने की पॉलिश की गई थी। यहां दीवारों पर हाथ में दर्पण लिए सुंदर स्त्री, पगड़ी पहने एक पुरूष और दंपत्ति के साथ बच्चों की मौजूदगी के भित्तिचित्र हैं जो इलाके की समृद्धि दर्शाते हैं। यह हवेली कई चौकों से युक्त है। चौक के चारों ओर सुंदर कक्ष बने हुए हैं। बरामदों के स्तंभों के बीच धनुषाकार आकृति बनी है। चौक से छत पर जाने के लिए जीने बने हुए हैं। चौक आम तौर पर खुले और बड़े हैं।

कैसे पहुंचे झुंझनूं

झुंझनूं के लिए बस व ट्रेन दोनों की सेवाएं हैं। झुंझनूं में ठहरने के लिए कुछ अच्छे लॉज और होटल हैं। शेखावाटी क्षेत्र के भ्रमण के दौरान झुंझझूं शहर ठहरने के लिए सबसे अच्छा केंद्र है।

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