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चित्तौड़गढ़ दुर्ग : राजस्थान का ऐतिहासिक किला

चित्तौड़गढ़ दुर्ग  (Chittorgarh Fort)

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रात्रि में चित्तौड़गढ़ दुर्ग का भव्य नजारा

चित्तोड़गढ दुर्ग भारत का सबसे बड़ा दुर्ग है। इस दुर्ग के साथ कई ऐतिहासिक मूल्य जुड़े होने करण यह दुर्ग राजस्थान के सभी दुर्गों में सबसे पहले याद किया जाता है।

इतिहास

चितौड़गढ़ भारत का सबसे बड़ा दुर्ग है। यह धरती से 180 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ की शिखा पर बना हुआ है। यह ऐतिहासिक दुर्ग सातवीं सदी में बनवाया गया था। ऐसा माना जाता है कि इस किले का उपयोग आठवीं से सोलहवीं सदी तक मेवाड़ पर राज करने वाले गहलोत और सिसोदिया राजवंशों ने निवास स्थल के रूप में किया। वर्ष 1568 में इस शानदार किले पर सम्राट अकबर ने अपना आधिपत्य जमा लिया। ऐसा माना जाता है कि मौर्य शासकों द्वारा निर्मित इस भव्य दुर्ग पर पंद्रहवीं और सोलहवीं सदी के दरमियान मुगल शासक अलाउद्दीन खिलजी ने तीन बार छापा मारा था।

आकर्षण

ऐतिहासिक स्थापत्य से भरपूर इस खूबसूरत दुर्ग को राजस्थान में आकर न देखना बहुत कुछ मिस करने जैसा है। दुर्ग के बहुत सारे पक्ष आकर्षण हैं और उन्हें देखा जाना चाहिए। इस दुर्ग की विशालता और ऊंचाई को देखते हुए कहा जाता है कि ’चित्तौड़ का दुर्ग पूरा देखने के लिए पत्थर के पांव चाहिएं।’  इस दुर्ग का विशेष आकर्षण यहां स्थित सात विशाल दरवाजे हैं। ये दरवाजे इतने विशाल आकार में अन्य किसी दुर्ग में देखने को नहीं मिलते। इसके अलावा दुर्ग परिसर में सैंकड़ों ऐतिहासिक और पुरामहत्व के मंदिर हैं। साथ ही पहाड़ की शिखा पर दुर्ग परिसर में कई जलाशय भी दुर्ग को विशेष बनाते हैं। इन सब आकर्षणों के अलावा सबसे खास हैं यहां के दो पाषाणीय स्तंभ, जिन्हें कीर्ति स्तंभ और विजय स्तंभ कहा जाता है। अपनी खूबसूरती, स्थापत्य और ऊंचाई से ये दोनो टॉवर पर्यटकों को बहुत आकर्षित करते हैं। दुर्ग के विभिन्न महल तो स्थापत्य का नायाब नमूना हैं ही।

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अगर आप चित्तौड़गढ़ दुर्ग देखने का मौका मिले तो दुर्ग परिसर में स्थित राणा कुभा का महल देखना ना भूलें। दुर्ग का सबसे खास और खूबसूरत हिस्सा यह महल ही है। पर्यटन और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह महल और दुर्ग परिसर बहुत महत्व के हैं। महल के अंदर झीना रानी का महल, सुंदर शीर्ष गुंबद और छतरियां, झीना रानी महल के पास गौमुख कुंड आदि खूबसूरत पर्यटन क्षेत्र हैं। दुर्ग में इसी कुंड के पास बड़ी संख्या में दुर्ग की रानियों, राजकुमारियों और महिलाओं ने जौहर किया था। मेवाड़ी सेनाओं के मुगलों से परास्त होने के बाद अपनी आन बान और इज्जत बचाने के लिए क्षत्राणी महिलाएं बड़े पैमाने पर जलती आग में कूद गई थी। उनके जौहर को यहां इस जादुई परिसर में रूह से महसूस किया जा सकता है।

महल एवं संग्रहालय

इसके अलावा यहां आम प्रजा के लिए बनवाया गया दीवान-ए-आम, शांतिनाथ स्थल एक खूबसूरत मुगल स्थापत्य से बने चबूतरे पर स्थित खूबसूरत जैन स्थल और फतेह प्रकाश पैलेस भी आकर्षण के प्रमुख केंद्र हैं। फतेह प्रकाश पैलेसे में मध्ययुगीन अस्त्र शस्त्रों, मूर्तियों, कलाओं और लोकजीवन में काम आने वाली पुरामहत्व की वस्तुओं का बेहतरीन संग्रह किया गया है। यह संग्रहालय राणा कुंभा महल रोड के ही एक किनारे पर स्थित है और बहुत प्रसिद्ध भी है। पर्यटकों के लिए यह स्थल सुबह 10 बजे से शाम साढे 4 बजे तक खुलता है।

कुंभश्याम मंदिर और विजय स्तंभ

इस विशाल दुर्ग के दक्षिणी परिसर में कुंभश्याम मंदिर बना हुआ है। यह मीरां बाई का ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मंदिर है। इसी मंदिर के नजदीक विजय स्तंभ भी बना हुआ है। यह नौ मंजिला शानदार टॉवर राणा कुभा ने 1437 में मालवा के सुल्तान पर विजय प्राप्त करने के बाद प्रतीक के तौर पर बनवाया था।

पदि्मनी महल

इसके अलावा इस दुर्ग का खास हिस्सा है पदि्मनी महल। दुर्ग परिसर के बीच एक छोटे सरोवर के निकट स्थित यह महल बहुत ही खूबसूरत है। इसी मंदिर के नजदीक भगवान सूर्य को समर्पित एक अन्य ऐतिहासिक मंदिर है, यह मंदिर है कालिका माता का मंदिर, आठवीं सदी के इस सुंदर छोटे मंदिर का स्थापत्य देखते ही बनता है। पदि्मनी महल का जनाना महल शीशों से निर्मित कक्षों से भरा हुआ है। इन छोटे छोटे शीशमहलों को देखकर पर्यटक मुग्ध हो जाते हैं। कहा जाता है यह वही स्थल है जहां अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पदि्मनी को देखा था और मोहित हो गया था।

दुर्ग के सूरजपोल और कीर्ती स्तंभ से चारों ओर अरावली की हरी-भरी पहाड़ियों का नजारा किसी स्वर्ग से कम नहीं लगाता। इन्हीं खूबसूरत दृश्यों को बारवहीं सदी में बना प्रथम दिगंबर तीर्थंकर का स्थल सोने में सुहागे की तरह नजर आता है। जीवन में एक बार चित्तौड़गढ दुर्ग को जरूर देखना चाहिए। यह वाकई दर्शनीय है। 

दुर्ग में प्रवेश शुल्क दस रुपए है। इस दुर्ग में रात 8 बजे बाद प्रवेश करने की इजाजत नहीं है। आप अगर कैमरा साथ लाए हैं तो कैमरे का चार्ज 25 रुपए अलग से देना होगा। यहां तीन-चार घंटे के लिए गाइड का शुल्क 250 रुपए तक होता है।

कैसे पहुंचें चित्तौड़गढ दुर्ग

चित्तौड़गढ़ राजस्थान का प्रमुख और लोकप्रिय पर्यटन स्थल है और इसलिए राजस्थान के किसी भी कोने से चित्तौड़गढ तक पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं आती। चित्तौड़गढ़ से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट डबोक, उदयपुर में है, जिसकी यहां से दुरी केवल 113 किमी है। इसके अलावा जयपुर एयरपोर्ट यहां से 330 किमी की दूरी पर है। चित्तौड़गढ बस व ट्रेन सेवाओं से भी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। चित्तौड़गढ शहर से चित्तौड़गढ दुर्ग जाने के लिए ऑटो को किराए पर लिया जा सकता है। तीन से चार घंटे की विजट के लिए आपको 300 से 400 रूपए चुकाने होंगे। इसके अलावा एक विकल्प टैक्सी का भी है। टैक्सी 1200 रुपए किराए में आपको चित्तौड़ के सभी लोकेशंस की सैर कराती है।

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