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जयपुर के संग्रहालय

जयपुर के संग्रहालय Museum in Jaipur

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जब भी जयपुर के संग्रहालयों की बात आती है तो सबके जेहन में सिर्फ अल्बर्ट हॉल और सिटी पैलेस का नाम आता है। वाकई अल्बर्ट हॉल और सिटी पैलेस अपने संग्रह, ऐतिहासिकता और बनावट से जयपुर ही नहीं बल्कि विश्व के सबसे खूबसूरत संग्रहालयों में शुमार हैं। लेकिन इन संग्रहालयों के अलावा भी जयपुर में बहुत से संग्रहलाय हैं जहां बहुत उपयोगी वस्तुओं का संग्रह किया गया है। आईये, उन संग्रहालयों की जानकारी लेते हैं जो अल्बर्ट हॉल या सिटी पैलेस की तरह अपनी पहचान तो नहीं बना पाए लेकिन संग्रह के मामले में मायने जरूर रखते हैं-

फिलेटली म्यूजियम

फिलेटली म्यूजियम डाट टिकटों का संग्रहालय है। जयपुर में मिर्जा इस्माइल रोड पर जीपीओ में फिलेटली म्यूजियम स्थित है। डाक टिकटों पर आधारित इस म्यूजियम की खास बात है यहां के अनूठे और दुर्लभ डाक टिकट। इस म्यूजियम में डाक विभाग की ओर से जारी होने वाले टिकटों में से कुछ विशेष और आकर्षक डाक टिकटों का यहां अनूठा संग्रह किया गया है। इसके साथ ही संग्रहालय में भारतीय डाक सिस्टम के बारे में भी बहुत दिलचस्प जानकारियां मिलती हैं। आजादी से पहले डाक विभाग किस तरह काम किया करता था, इस विषय पर पोस्टल सामग्री एकत्रित करके यहां संजोई गई है। अफसोस की बात ये है कि ज्यादातर लोगों को इस म्यूजियम के बारे में जानकारी ही नहीं है। जीपीओ में वैसे रोजाना सैंकडों लोगों का आना जाना होता है लेकिन म्यूजियम में ट्रैफिक बहुत कम रहता है। डाक टिकट प्रेमियों के लिए इस म्यूजियम में बहुत सी सामग्री है। वे यहां आकर इस अनूठे संग्रहालय का विजिट कर सकते हैं।

डॉल म्यूजियम

डॉल म्यूजियम में विभिन्न देशों के परिधान और चेहरों वाली खूबसूरत गुडियाओं का संग्रहालय है। यह म्यूजियम जवाहर लाल नेहरू मार्ग पर त्रिमूर्ति सर्किल के पास सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक बधिर संस्थान परिसर में स्थित है। दो कक्षों वाले इस डॉल म्यूजियम का नाम है भगवानी बाई शेखसरिया डॉल म्यूजियम। यहां देशी के साथ साथ विदेशी गुडियाओं के सेक्शन में अमेरिका, मैक्सिको, ब्राजील, बेल्जियम, ब्रिटेन, नार्वे, स्वीडन, फ्रांस, नीदरलैंड, जापान, कोरिया, मध्यपूर्ण व दक्षिण एशियाई देशों की संस्कृति को दर्शाती लगभग 200 गुडियाओं का संग्रह किया गया है। म्यूजियम वाकई बच्चों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। बच्चे गुडियाओं के माध्यम से विभिन्न देशों के पहनावे, आभूषणों और मुखाकृतियों को समझ सकते हैं। सभी गुडियाएं बहुत खूबसूरती से बनाई गई हैं और उनके पहनावे में भी पर्याप्त कलात्मकता है। लेकिन बहुत कम दर्शक आने से संग्रहालय की सुध नहीं ली जा रही है।

जियोलॉजिकल म्यूजियम

इस म्यूजियम में डायनासोर की हड्डी, अंडे का जीवाश्म, जुरासिक रॉक जैसी पुरा-ऐतिहासिक सामग्री का संग्रह किया गया है। यह म्यूजियम भू सर्वेक्षण विभाग वेस्ट जोन के झालाना संस्थानिक क्षेत्र परिसर में स्थित है। इसे सेंट्रल जियोलॉजिकल म्यूजियम के नाम से जाना जाता है। म्यूजियम में कई दुर्लभतम वस्तुओं का संग्रह किया गया है। म्यूजियम के सुपर ग्रुप सेक्शन में करोडों साल पहले की भूगर्भ संरचनाओं को बयान करती भौतिक वस्तुओं का संग्रह, जुरासिक रॉक सेक्शन में विभिन्न स्थानों से संग्रह की गई चट्टानें और गुजरात से प्राप्त महत्वपूर्ण अवशेष जिनमें डायनासोर की हड्डी और अंडे का जीवश्म आदि संग्रहीत किए गए हैं। स्कूलों के छात्रों, भूगोल के विद्यार्थियों और इतिहास के शोधार्थी छात्रों के लिए यह म्यूजियम बहुत उपयोगी है। लेकिन  पर्याप्त जानकारी के अभाव में छात्र यहां तक पहुंच ही नहीं पाते हैं।

अलंकार कला म्यूजियम

अलंकार कला म्यूजियम में राजस्थान की विभिन्न हस्त कलाकृतियों का संग्रह किया गया है। यह म्यूजियम जवाहर कला केंद्र में स्थित है। शहर की सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के प्रमुख इस केंद्र में इस म्यूजियम की स्थापना 1993 में की गई थी। इस म्यूजियम में सिरेमिक, टेरेकोटा, नाथद्वारा की पिछवाइयां, जैसलमेर और बाडमेर की  फड़ चित्रकारी, वुडन कार्विंग की लगभग 700 कलाकृतियां संग्रहीत हैं। पीतल और तांबे पर नक्काशी के बर्तन, काला गोरा भैरव की प्रतिमाएं, पालकी और रथ की मुख्याकृतियों को इस म्यूजियम में संजोया गया है। जवाहर कला केंद्र में भी प्रतिदिन सैंकड़ों की तादाद में युवा और कला मर्मज्ञ आते हैं लेकिन उनमें से बहुत कम लोग म्यूजियम की ओर रुख करते हैं। इस खूबसूरत म्यूजियम में राजस्थान की कलाओं को बारीकी से जाना समझा जा सकता है।

इनके अलावा कुछ राजकीय संग्रहालय भी हैं, जो फिलहाल बंद पड़े हैं। आइये, इनके बारे में भी जानकारी लें-

राजकीय संग्रहालय आमेर

आमेर के दलाराम बाग में यह संग्रहालय चलता था। जिसमें महिषासुर मर्दिनी, गज लक्ष्मी की प्राचीन प्रतिमा, उत्खनन सामग्री, पुराने मगरमच्छ, हाथी की मुंह की आकृति के परनाले आदि प्रदर्शित थे। इसी प्रकार आमेर की कला दीर्घा में आमेर के शासकों के कागज व हाथी दांत पर बने लघु चित्र, आमेर का बड़ा फोटो, सवाई जयसिंह को कविता सुनाते हुए बिहारीजी का मॉडल सहित कई पुरासामग्री प्रदर्शित थी। इस कला दीर्घा की जगह अभी वीआईपी लॉन्ज चल रहा है।

राजकीय संग्रहालय जंतर-मंतर

जंतर मंतर वेधशाला में चलने वाले इस संग्रहालय में सभी राशियों के मॉडल व अन्य पुरा सामग्री प्रदर्शित थी। इस संग्रहालय की जगह अब यहां इंटर प्रिंटेर सेंटर का निर्माण किया गया है।

राजकीय संग्रहालय हवामहल

हवामहल के चौक में स्थित इस संग्रहालय में पाषाण प्रतिमाएं, धातु की प्रतिमाएं व पीतल की पुरा सामग्री सहित शिलालेख व सिक्के प्रदर्शित थे।

तो, देखा आपने? जयपुर में म्यूजियम की कमी नहीं है। कमी है तो बस इन महत्वपूर्ण संग्रहालयों को तवज्जो देने की। यदि जयपुर के स्कूल चाहें तो समय समय पर अपने बच्चों को इन म्यूजियम का दौरा कराकर उन्हें देश के डाक विभाग, विश्व संस्कृति, भौतिक इतिहास और राजस्थान की कला संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां दे सकते हैं। वास्तव में जयपुर कलाओं का सम्मान करने वाला शहर है। इसीलिए सिर्फ इसी शहर में इतने सारे संग्रहालाओं में देश दुनिया की कलाओं का संग्रह किया गया है। हमारा दायित्व है, संग्रह का इतना खूबसूरत प्रयास करने वालों की हौसला अफजाई की जाए, इन संग्रहालयों का दौरा करके।

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