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जलधारा, जयपुर

JalDhara

जलधारा
Jaldhra

जयपुर दुनिया के बेहतरीन और खूबसूरत शहरों में शुमार किया जाता है। यहां खूबूसूरत ऐतिहासिक स्थलों की भरमार है जिसे देखने के लिए विश्वभर से पर्यटक यहां हर साल आते हैं। जयपुर के बारे में यह आम राय है कि जयपुर में देखने लायक स्थल ज्यादातर परकोटा शहर या फिर आमेर में हैं। लेकिन चारों दिशाओं में फैलते इस शहर का नया रूप भी बहुत खूबसूरत है। यहां विकसित किए गए नए पर्यटन स्थलों में जलधारा भी अहम स्थान रखती है।

जलधारा प्रकृति को बचाने के लिए और साथ ही गुलाबी शहर को और भी सुंदर, आकर्षक बनाने के लिए किए गए प्रयासों में से एक है। साथ ही ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से किया गया यह एक अनूठा प्रयास है। यह एक अद्भुत पानी के फव्वारे युक्त उद्यान है जिसे जलधारा नाम दिया गया है। जयपुर में जेएलएन मार्ग पर कुलिश स्मृति वन और शिक्षा सकुंल के बीच बने इस सुंदर उद्यान का प्रमुख आकर्षण पानी के फव्वारे और जल की कृत्रिम धारा है।

जयपुर के खूबसूरत लोकेशंन को कवर करने के क्रम में हमारी टीम ने इस जगह का दौरा किया और जाना कि परिवार के साथ यहां कोई शाम बिताना कितना खूबसूरत और दिलचस्प अहसास है। हमने यहां दो घंटे बिताकर जलधारा के बारे में कुछ तथ्य जुटाए। आम तौर पर यहां सैर करने के लिए आपको 10 रुपए प्रति सदस्य खर्च करने पड़ेंगे। शनिवार और रविवार को यहां सैर करने का टिकट 20 रुपए होता है। टिकट प्राप्त करने के लिए यहां उद्यान के बाहर दो खिड़कियां हैं।

यहां से टिकट लेकर जब आप भीतर प्रविष्ट होंगे तो जलधारा तक पहुंचने के लिए लाल पत्थर की खूबसूरत सीढ़ियां हैं जिनके दोनो ओर शिल्पकारी और उद्यानिक सजावट आपका मन मोह लेती है। नीचे पहुंचकर आप अपने आप को एक पुलिया और उसके साथ लगी हरी भरी घाटी में पाएंगे। जिसके बीचों बीच से पानी की एक धारा गुजर रही है। जलधारा फव्वारे की ऊंचाई 40 फीट के आसपास है और घाटी की लंबाई लगभग आधा लंबी है। इस घाटी को पौधों, पेड़ों, मूर्तियों, पुलों और पंछियों की मौजूदगी से सजाया गया है। धारा के दोनो ओर एक पाथ बनाया गया है जहां जगह जगह बैठने के लिए बैंचें भी लगाई गई हैं। आप यहां खाने पीने के लिए कुछ सामान ला सकते हैं और अपने परिवार और मित्रों के साथ आनंद ले सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें, कचरापात्र का इस्तेमाल जरूर करें। इस उद्यान में कृत्रिम चट्टानों पर उकेरे गए सुंदर शिल्प मन मोह लेते हैं। इसके अलावा सुंदर साइन बोर्ड आपको जगह के बारे में आवश्यक जानकारियां देंगे।

वॉटर रिसायकलबिन- जलधारा के बारे में जानने लायक सबसे खास बात रही कि यहां जलधारा में जिस पानी का इस्तेमाल किया गया है वह रिसायकिलबिन के तहत प्रयोग किया जा रहा है। हमें हैरत हुई कि हर साल जो लाखों गैलन गंदा पानी नालों से होता हुआ शहर में कीचड़ और दुर्गन्ध पैदा किया करता उसी जल को रिसाइकिलबिन करके इतनी खूबसूरती से प्रयोग किया गया है। खास बात यह है कि यह जल बहते हुए बहुत ही निर्मल दिखाई देता है और दुर्गंध का नामोनिशान भी नहीं है।

चारों ओर झालाना की पहाड़ियों और हरियाली से भरे इस खूबसूरत उद्यान में बैठकर आप खुले आकाश के नीचे कुछ आरामदायक पल बिता सकते हैं। शहर की भीड़ और भागमभाग के बीच यह उद्यान आपको पूरी तरह छोटे जंगल और नदी का आभास कराएगा। यहां जगह जगह बनी छोटी झोपड़ियां और मचान बच्चों को बेहद आकर्षित करते हैं। गर्मियों के मौसम में यहां की शाम आपके परिवार के लिए घूमने का खूबसूरत विकल्प है।

जलधारा में इन खूबियों के अलावा भी बहुत सारी चीजें हैं जो बच्चों को तो आकर्षित करती ही हैं, बड़ों का भी मन मोह लेती हैं। जैसे डॉल्फिन मछली की विशाल मूर्तियां, कृत्रिम पक्षी और जीव जंतुओं से भरा वातावरण चिड़ियाघर का आभास देता है। पानी की धारा में तैरते कृत्रिम मगरमच्छ और कछुआ आदि जल की इस नकली धारा को असली जैसा स्वरूप प्रदान करते हैं। यहां दो प्रकाश फव्वारे भी उपलब्ध हैं जो शाम के समय यहां के वातावरण को और भी सुखद बना देते हैं।

जयपुर जैसे खूबसूरत शहर और यहां के उद्यानों में भ्रमण करने क लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है। यह उद्यान सिर्फ बच्चों या युवाओं के लिए ही नहीं हैं। जीवन के ढलते पड़ाव में भी आप यहां आकर सुकून के कुछ पल बिता सकते हैं, और निश्चय ही आपको यहां बिताए पल आनंद प्रदान करेंगे। जलधारा के उद्घाटन के बाद से ही यहां आगंतुकों की संख्या दिन ब दिन बढ़ रही हैं। अगर जयपुर में रहते हुए भी आपने अभी तक जलधारा का दौरा नहीं किया है तो जरूर परिवार या मित्रों के साथ यहां जरूर जाएं।

हम यहां खास तौर से कहना चाहेंगे के वे युवा जो जयपुर के खुले वातावरण में अपनी महिला मित्र या पुरुष मित्र के साथ घूमना फिरना पसंद करते हैं वे अब बेहिचक यहां आ सकते हैं। जयपुर में युवाओं को आरंभ से कनक घाटी, कनक वृंदावन, रामनिवास बाग और सेंट्रल पार्क जैसे उद्यान लुभाते हैं। इस लेकिन इन सभी स्थानों पर लोगों की आवाजाही, ट्रैफिक और भीड़ ज्यादा होने के कारण युवाओं का रुझान नए रास्तों की ओर हुआ है। इन नए स्थानों में कुलिश स्मृति वन और जलधारा महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। यहां शांत और सौम्य वातावरण में आप अपने मित्र के साथ अच्छा और तनाव रहित समय बिता सकते हैं।

संक्षेप में हम कह सकते हैं कि जलधारा एक शांत और सौम्य वातावरण में बना खूबसूरत उद्यान है जो जयपुर विकास प्राधिकरण की ’क्लीन सिटी, ग्रीन सिटी’  योजना के तहत किए गए कार्यों का सुंदर सुबूत नजर आता है। प्रकृति को बचाने और ग्लोबल वार्मिंग से निबटने के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत इन सुंदर उद्यानों को हरा भरा रखना और शांत व सौम्य वातावरण बनाए रखना हम नागरिकों की भी जिम्मेदारी है।

वास्तव में इस सुंदर स्थान का दौरा कर हम जान गए कि परकोटा से बाहर भी जयपुर में कुछ अच्छे घूमने लायक स्थान हैं जहां हम और आप सुकून के कुछ पल बिता सकते हैं। यहां आकर आप अपना वाहन शिक्षा सकुंल के बाहर जेएलएन मार्ग से सटे खुले मैदान में आसानी से पार्क कर सकते हैं। साथ ही इस मैदान में लगी चौपाटी पर लजीज व्यंजनों का चटपटा स्वाद भी ले सकते हैं।

पिछले दिनों जयपुर में हुई रिकॉर्ड बारिश के कारण जलधारा के बहुत बड़े भू-भाग को नुकसान पहुंचा है और इन दिनों जलधारा को बंद कर इस नुकसान की भरपाई की जा रही है। हम आशा करते हैं कि नगर निगम और जेडीए मिलकर इस नुकसान को जल्द से जल्द दूर कर इस सुंदर उद्यान को फिर से नागरिकों के लिए खोलें।

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2 Comments on जलधारा, जयपुर

  1. छह महिने से बंद जलधारा
    जयपुर में जेएलएन मार्ग पर स्थित उद्यान जलधारा पिछले छह महिनों से बंद पड़ी है। फिलहाल जलधारा के जल्दी आरंभ नहीं होने के आसार नहीं हैं। पहले अनुबंधित कंपनी से विवाद और अब नगर निगम की टूटी सीवर लाइन के कारण जलधारा को ठीक कराने का काम ठप पड़ गया है। झालाना इलाके की सीवर लाइन टूटने से सारा पानी जलधारा के नाले में पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। जेडीए ने नगर निगम को इस संबंध में अवगत भी करा दिया लेकिन अब तक स्थिति वैसी ही है। जेडीए ने अनुबंधित ठेकेदार को डेढ माह में काम पूरा करने के निर्देश रखे हैं लेकिन अधिशासी अभियंता ने निगम पर जिम्मेदारी टाल दी। भारी बारिश के कारण जलधारा 22 अगस्त से बंद है। यहां पाथ वे में बडे कटाव के अलावा पुल टूटा हुआ है और जगह जगह मिट्टी कंक्रीट भर गई। इसके अलावा विद्युत लाइनें भी उखड गई और फव्वारा कचरे से अटा हुआ है।

  2. इधर पारा, उधर जलधारा

    जयपुर में इन दिनों आग बरस रही है। मई का तपता महीना और 45 के पार पारे ने लोगों और बच्चों को घर में ही दुबके रहने को मजबूर कर दिया है। शाम साढे सात बजे तक चलती गर्म हवाओं ने भी परेशान कर रखा है। ऐसे में जलधारा एक सुखद विकल्प के रूप में सामने है। यहां हर शाम परिवार के साथ लोग पहुंच रहे हैं। जलधारा के फव्वारे से झरती बूंदें हवा के साथ मिलकर ठंडक का अहसास करती हैं। वहीं घने पेड़ पौधों के बीच जल की धारा से भी शाम को यहां पुरसुकून मिलता है। जलधारा के बाहर हर शाम लगने वाली चौपाटी भी परिवारों को आकर्षित कर रही है।

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