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शान से मनाया जयपुर का स्थापना दिवस

अपने प्यारे शहर जयपुर का 286 वां जन्मदिन शहरवासियों ने बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया। राजस्थान फोरम, त्रिमूर्ति संस्था और नगर निगम की ओर से स्थापना दिवस समारोह के तहत कार्यक्रमों की चारदिवसीय श्रंख्ला शहर के विभिन्न हिस्सों में हो रही है। स्थापना दिवस के दिन रविवार को दिन की शुरूआत जहां ठहाकों से हुई, वहीं शाम के आंचल में संजीदा शब्दों का गुलदस्ता सजाया गया।

ठहाका महोत्सव-
राजस्थान फाउंडेशन, त्रिमूर्ति संस्था और पतंजलि योग संस्था की ओर से वैशालीनगर के नर्सरी पार्क में सुबह 7 बजे से हुए हंसी ठहाकों के इस आयोजन में लाफ्टर फेम एकेश पार्थ ने पत्नी से जुडे चुटीले लतीफों से सभी को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। पार्क में सुबह की सैर के लिए आए स्थानीय लोग ठहाकों की गूंज सुनकर ठिठके और ठहाका महोत्सव में शामिल हो गए। जयपुर का जन्मदिन मनाने का इससे ताजा-तरीन और खुशनुमा शुरूआत और क्या हो सकती थी। कार्यक्रम के आरंभ में सभी लोगों ने डॉ एस बी दवे के निर्देशन में हाथ उठाकर हास्य योग किया। इस अनूठे योग ने सभी को खिलखिलाती शुरूआत दी। और उसके बाद शब्दों के साधकों ने अपनी रचनाओं से सभी को लोट-पोट कर दिया। उदयपुर के हास्य कवि प्रकाश नागौरी ने भी बैंक में होने वाले आम लेन-देन, नोटों की अदला-बदली और अन्य क्रिया कलापों को संदर्भ बनाकर बेहतरीन हास्य प्रस्तुतियां दीं। अजमेर के रास बिहारी ने अपने तीखे हास्य व्यंग्यों से करप्शन पर कड़ा प्रहार किया। उनके शब्दों में जितना व्यंग्य था उतना ही हास भी।

रंगों के पैरहन से सजा अल्बर्ट हॉल-
जयपुर की शुरूआत जहां हंसी ठहाकों से हुई वहीं गुनगुनी धूप ने जयपुर के युवा चितेरों को अल्बर्ट हॉल के सामने खुले प्रांगण में एकत्र कर म्यूजियम को रंगों को लिबास पहनाया। राजस्थान ललित कला अकादमी की ओर से यहां पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर शहर के युवा चित्रकार शिखा राजोरिया, रविंद्र कुमार कुमावत, बरखा जैन, प्रेरणा खंडेलवाल, गजेंद्र कुमावत, शुभा बहादुर, श्वेत गोयल, माइकल रविकांत शर्मा, पवन शर्मा, पूजा शर्मा, रामप्रसाद सैनी, निधि पालीवाल, मनीषा राठौड़, प्राची गढ़वाल, जयंती शर्मा, अंकित शर्मा, हृदेश शर्मा ने केनवास पर बेहतरीन रंगों से अपने शहर और उसे लेकर अपनी सोच को उकेरा। अकादमी अध्यक्ष भवानी शंकर शर्मा ने सभी का उत्साह बढ़ाया।
इस मौके पर नीरजा मोदी स्कूल में चल रहे कला शिविर में भाग ले रहे ख्यातनाम चित्रकारों की मौजूदगी से युवा चित्रकारों का हौसला और बढ़ा। सभी बड़े चित्रकारों ने एक ही केनवास पर  जयपुर स्थापना की खुशी जाहिर करते हुए तूलिका चलाई।

गैटोर में गूंजा आराधना-स्वर
दोपहर आगे बढ़ी तो अपरान्ह गैटोर से उठे आराधना के स्वरों ने जयपुर के प्रति भिक्त का भाव उपजा दिया। यहां गैटेश्वर कला संस्थान की ओर से भिक्त संगीत का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें राजपरिवार से देवराजसिंह और सरकार की ओर से मंत्री ब्रजकिशोर शर्मा मौजूद थे। यहां संस्था के कलाकारों ने विश्वेश्वरनाथ टाटीवाल के लिखे भजनों की प्रस्तुति दी। पं जगदीश शर्मा, शशिमोहन पारीक और आशा गुप्ता ने भजनों की उम्दा प्रस्तुतियां दी।
कार्यक्रम की शुरूआत में जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय को याद किया गया। महाराजा के स्मारक पर देवराजसिंह ने पुष्प अर्पित किए।

शाम के लिबास पर शब्द-तारे
प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से जयपुर स्थापना समारोह के तहत शाम को प्रेस क्लब में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि हरीश करमचंदानी, अध्यक्ष सवाईसिंह शेखावत और मंच संचालक प्रेमचंद गांधी थे। गोष्ठी में कैलाश मनटर, ओमेन्द्र, अवध बिहारी विषादी, आदिल रजा मंसूरी, राघवेंद्र, लोकेश शुक्ल, रितुराज, रमेश खत्री, दुष्यंत, गोविंद माथुर सरीखे कवियों ने अपनी संजीदाएं रचना पेशकर मौजूद काव्यप्रेमियों की वाहवाही लूटी। गोष्ठी में आदिल रजा ने नज्म ’लटका दिया दिन खूंटी पर, हंगर से रात उतारी’, कैलाश मनटर ने ’खुलता हूं, किसी वीरान बीहड़ में बनी कोठरी के जर्जर किवाड़ों की तरह चरमराता, खुलता हूं’ और ’पुराना शहर, अभी पुराना ही है’, कवि अवध बिहारी ने ’प्रतिदिन औसतन दो बलात्कार, तीन हत्याएं’, गोविंद माथुर ने ’जब नहीं बचा इलाहाबाद में इलाहाबाद’, ओमेन्द्र ने ’रामू फिर आ गया गांव से शहर में’, दुष्यंत ने ’प्रेम को बचा लेना कला है, वरना उड़ जाएगा कपूर की तरह’, रमेश खत्री ने ’प्रतीक्षा में याद करता हूं’ आदि रचनाएं सुनाकर शाम को कई रंग दिए।

जयपुर स्थापना दिवस समारोह 21 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। समारोह के तहत शहर के विभिन्न हिस्सों में अनेक आयोजन होंगे।

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