News Ticker

आम प्रवेश वर्जित है…

मैं
जयपुर का आम निवासी  हूं।
आम…।
मुझे कुछ अरसा पहले तक लगता था कि मैं इस खूबसूरत गुलाबी शहर का एक निवासी हूं, बस। लेकिन वक्त की बदलती करवटों ने हम  निवासियों को आम और खास में बांट दिया है।
आमेर से बस में कभी परकोटे आ रहा होता तो खिड़की से मानसागर के बीच जल-तप कर रहे साधु सी इमारत नजर आता थी-जलमहल।
किनारों पर उगे झाड़-झंखाड़, पानी की सतह पर कचरे के दाग भी दिखते थे। छोटी नौकाओं में पास की बस्तियों के बच्चे मछलियों की जुगत में दिखते थे। तैराक महारथी किशोरों में शर्त लगती थी तेजी से तैरकर  इमारत को छूकर आने की।
झील के किनारे एक ओर खुले मैदान में क्रिकेट खेलते, उलझते बच्चों पर भी नजर जाती थी।
कभी मन अशांत होता तो यहीं चला आता था।  इसी तपस्वी के पास। जिसके सिर पर चमेली बाग में उगे वृक्ष बढ़ी हुई जटाओं-से थे।
जिसके आधार के पास उगी मूंज घास सफेद दाढ़ी की  तरह थी और जिसकी दीवारों पर जमी हरी काली शैवाल भस्म रमाने का एहसास दिलाती थी। मानसागर का हिलता पानी यूं लगता था कि मौन तपस्वी सांसें ले रहा  है, बच्चों की अठखेलियों पर मुस्कुरा रहा है। आमंत्रण दे रहा है-’मेरे पास आओ, मैं मौन सही, लेकिन मूक नहीं, तन्हा नहीं।’
ठीक उसी पल लगता था कि जलमहल  मेरा है और मैं जलमहल का। घंटों मेरी आंखें उस अद्भुद नजारे से  बातें किया करती जहां सिर्फ और सिर्फ अपनापन महसूस होता था, मेरापन महसूस होता था। किसी गांव के उस विशाल वटवृक्ष की भांति जिसकी जड़ों पर बच्चे पूरे अिधकार से दोपहर भर झूला झूलते हैं। वह किसी की जागीर नहीं होता, सिर्फ बच्चों की हंसी उसकी मालिक होती है।
आज।
देखता हूं बहुत रौनक हो गई है जलमहल और उसके आस-पास। किनारे पर सुंदर बाग और चौपाटियां गढ़ दी गई हैं। मानसागर के किनारे से गोलाकार धूमती सड़क पर लोग ऊंटों की मस्तानी सवारी का आनंद ले रहे हैं। मेरे तपस्वी को नहला-धुला कर दाढ़ी मूंढ दी गई है। पानी भी बिल्कुल साफ। क्या ठाठ-बाट हैं। जलमहल अब तपस्वी नहीं लग रहा।
आज,
मन किया, बच्चों को पास के मैदान में क्रिकेट खेलते  देखूं, छोटी-छोटी कश्तियों में बच्चों को मछलियां पकड़ने की जुगत करते देखूं। किशोरों को शर्त लगाकर जलमहल तक तैरते देखूं।
लेकिन यह क्या?
मैदान तो है लेकिन बच्चों का नहीं रहा। एक ऊंची दीवार खींच दी गई है, कंटीले तार कस दिए गए हैं। एक बड़ा लोहे का दरवाजा है जिसपर प्रहरी तैनात हैं। भीतर जाने की कोशिश करता हूं तो प्रहरी रोक देता है, एक सवाल दागता है-’किसकी परमीशन  से आए हो, क्या वीआईपी पास है?’ फिर वो मेरी सूरत पर गौर करके दंभ से कहता है-’आम प्रवेश वर्जित है।’
’आम…!’
इस शब्द ने मुझे एक ही झटके में निवासी से आम निवासी बना दिया।
सुना है, नौकाएं हंसाकार हो गई हैं। लेकिन उनका सफर मेरा नहीं। सुना है, तटों के मैदान पर जड़ से उखाड़े वृक्ष लगाए गए हैं। लेकिन तट पास की बस्ती के बच्चों के क्रिकेट खेलने के लिए नहीं रहे।
मौन तपस्वी अप-टू-डेट हो गया है।
सुना है, उसके भीतर भी काया-कल्प कर दिया गया है। भित्तिचित्रों को 22 कैरेट गोल्ड के रंगों से दुबारा सजाया गया है। हर दीवार, हर कोना बहुत खूबसूरत बना दिया गया है। छत के चमेली बाग पर भी बहार आ गई है। भीतर संग्रहालय, रेस्टोरेंट जाने क्या-क्या गढ़ लिए गए हैं। ये बहुत अच्छा हुआ। बहुत खुशी की बात है।
लेकिन…। क्या मेरे लिए? या सिर्फ खास लोगों के लिए। सिफारिशी चिट्ठी वालों के लिए। जेबों में डॉलर्स रखने वालों के लिए। विदेशी मेहमानों के लिए। किसके लिए?
मानसागर की मछलियां तक खास हो गई हैं। अब वे बदबूदार ’आम’ बैक्टीरिया को खाएंगी।
इस बदलाव में कुछ तो मेरे हिस्से भी आया है। एक डर।
मुझे डर लगता है अब जलमहल के किनारे बनी सुंदर पाल की सीढि़यों पर बैठते। मानसागर का पानी अब भी हिलता है। लेकिन लगता नहीं कि तपस्वी सांसें ले रहा है, मुस्कुरा रहा है।
अब लगता है बस ’खास’ लोगों के मनोरंजन के लिए एक खूबसूरत  बुत पानी के बीच रख दिया गया है। झील के उत्तरी किनारे  पर खड़े दो मानवनुमा विशाल बुत आपस में मेरी दास्तान साझा करते होंगे।
मेरे डर की दास्तान-
क्या एक-एक इमारत कर मुझसे मेरा सारा शहर छीन लिया जाएगा? क्या कभी ऐसा तो नहीं होगा कि परकोटे के सभी सातों दरवाजों पर एक इबारत लिख दी जाए-
’आम प्रवेश वर्जित है।’

About Pinkcity.com (2998 Articles)
Our company deals with "Managing Reputations." We develop and research on Online Communication systems to understand and support clients, as well as try to influence their opinion and behavior. We own, several websites, which includes: Travel Portals: Jaipur.org, Pinkcity.com, RajasthanPlus.com and much more Oline Visitor's Tracking and Communication System: Chatwoo.com Hosting Review and Recommender Systems: SiteGeek.com Technology Magazines: Ananova.com Hosting Services: Cpwebhosting.com We offer our services, to businesses and voluntary organizations. Our core skills are in developing and maintaining goodwill and understanding between an organization and its public. We also conduct research to find out the concerns and expectations of an organization's stakeholders.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: