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रामनारायण चौधरी का निधन

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रामनारायण चौधरी (Ramnarayan Choudhary) का लंबी बीमारी के बाद बुधवार देर रात यहां फोर्टिस अस्पताल में निधन हो गया। 84 वर्षीय चौधरी काफी समय से बीमार चल रहे थे। पिछले महीने फेफड़ों में संक्रमण और न्यूमोनिया से पीड़ित होने के बाद उसे वे अस्पताल में भर्ती थे। उनके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री है। उनकी पुत्री मंडावा विधायक रीटा चौधरी उनकी देखभाल कर रही थीं। चौधरी के निधन का समाचार मिलते ही कांग्रेस में शोक की लहर छा गई। मुयमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष चंद्रभान सहित कई नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया है। रामनारायण चौधरी का जन्म 22 फरवरी 1928 को झुंझुनूं जिले में हेतमसर गांव में हुआ। वे इंटरमीडिएट तक शिक्षित थे। 67 में वे पहली बार मंडावा से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए। चौधरी सात बार विधायक रहे। नवंबर 71 से मार्च 72 तक विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे।  नवंबर 73 को वे हरिदेव जोशी के मंत्रिमंडल में सहकारिता, स्वायत्त शासन, नगर आयोजन, पंचायती राज, जेल और मुद्रण आदि विभागों के मंत्री रहे। 77 के चुनाव में वे कांग्रेस टिकट पर ऐसे समय चुने गए जब जनता पार्टी की लहर थी। जनता पार्टी सरकार में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष रहे। हालांकि 80 में कांग्रेस लहर के समय चुनाव हार गए और कुछ अरसे बाद पीसीसी के अध्यक्ष बनाए गए। 82 में उन्हें राजस्थान आवासन मंडल का अध्यक्ष मनोनीत किया गया। 1983 में मंडावा क्षेत्र से उप चुनाव में फिर विधायक चुन लिए गए। 85 और 90 के चुनावों में उनका टिकट कट गया। लेकिन 93 में वे फिर विधायक चुने गए। 2003 के चुनाव में वे फिर जीते तो उन्हें विधानसभा उपाध्यक्ष बनाया गया और एक बार फिर नेता प्रतिपक्ष नियुक्त नियुक्त गया। पिछले चुनाव में उन्होंने अपनी बेटी रीटा चौधरी को टिकट दिलवाया और विधानसभा भेजने में मदद की।

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