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आमेर- एक इतिहास

Amber Fort

Amber fortआमेर जयपुर का एक उपनगर है। एक समय था जब आमेर ही यहां के राजाओं की मुख्य राजधानी हुआ करती थी। तीन ओर पहाडियों से घिरा यह नगर बहुत खूबसूरत था और समृद्ध भी। फिर ऐसी क्या वजहें रहीं कि यहां के राजाओं ने आमेर छोड़कर जयपुर को नई राजधानी के रूप में बसाया था। जब हमने यह अतीत खंगाला तो सामने आया आमेर का हजार वर्ष पुराना गौरवशाली इतिहास।

अवस्थिति

जयपुर शहर के उत्तर में 11 किमी की दूरी पर अरावली की पहाडियों से घिरा जयपुर का ही एक उपनगर है  आमेर। अगर आमेर के इतिहास के पन्ने पलटें तो 1727 में बसा नया शहर जयपुर आमेर के सामने नवजात शिशु नजर आता है।

इतिहास

ऐतिहासिक तथ्यों से जानकारी मिलती है कि आमेर प्रदेश में कछवाहा वंश के राजाओं से पहले मीणा राजाओं का  शासन था। आमेर को मीणा राजा आसन सिंह ने बसाया था बाद में 11 वीं सदी में कछवाहा राजाओं ने मीणाओं की  हकूमत का अंत कर ईण् 1037 में शासन स्थापित किया। हजार वर्ष से ज्यादा प्राचीन इन ऐतिहासिक नगर के किले महल मंदिर हवेलियां जलाशय और आवास अपनी शुद्ध हिन्दू राजपूत स्थापत्य शैली से विश्वभर में पर्यटकों और इतिहासकारों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

विभिन्न मत

Amber fortआमेर के नाम पर इतिहासकारों में एकमत नहीं है। कुछ लोग कहते हैं कि आमेर के मीणा शासक देवी अम्बा के भक्त थे इसी कारण उन्होंने  यह नगर आम्बेर के नाम से बसाया।कुछ विद्वान आमेर को अम्बिकेश्वर  महादेव के नाम पर भी बसा होना मानते हैं। कुछ तर्कों और किंवदंतियों के अनुसार जयपुर के कछवाहा शासक स्वयंको  भगवान रामके छोटे पुत्र कुश के वंशज मानते हैं। इन्हीं राजा कुश के वंशज थे राजकुमार अंबरीश जो अयोध्या के उत्तराधिकारी थे। कहा जाताहै कि अम्बरीश भक्त और दानी थे। उन्होंने महल के कोठार और गोदाम गरीबों के लिए खोल रखे थे। जब यह बात उनकेपिता के पता पड़ी तो उन्होंने अम्बरीश को राज्य के अहित का दोषी पाया। राजकर्मियों ने जब नुकसान का आंकलन करने के लिए कोठार खोले तो यह देखकर दंग रह गए कि कोठार अन्न और विपुल संपदा से भरे पड़े हैं। इन्हीं अम्बरीश ने भक्ति के लिए अरावली की पहाडियों में बसे इस भाग को चुना और उन्हीं  के नाम पर कालान्तर में इस क्षेत्र का नाम आम्बेर और फिर आमेर पड़ा।

मीणा शासकों को पराजित कर कछवाहा शासकों ने आमेर पर 1037 से 1727 तक शासन किया और बाद में  जलसंकट एवं बढती जनसंख्या के कारण राजधानी आमेर से जयपुर स्थानांतरित कर दी गई। ऐतिहासिक स्थल आमेर छोटा लेकिन अनेक प्राचीन महलों, मंदिरों, बागों-जलाशयों-बावडियों और हवेलियों से घिरा उपनगर है। इसके 4 वर्ग किमीके दायरे में ही 18 प्राचीन धार्मिक स्थल है।

आमेर रियासत के जयपुर स्थानांतरित हो जाने के बाद यहां की आबादी का अधिकतर भाग नए शहर में जाकर बस गया लेकिन कुछ परिवार यहीं रह गए और उन्होंने आमेर को बसाए रखा। लेकिन फिर भी आमेर के ज्यादातर हवेलियां, भवन और मंदिर खण्डहर  हालत में देखे जा सकते है।

क्यों बसाया नया शहर

महाराजा सवाई जयसिंह आमेर रियासत के ख्यातनाम योद्धा, और मुगल सेनापति थे। आमेर तीन ओर से पहाडियों और जंगलों से घिरा इलाका था। यह छोटा से इलाका पूरी तरह समृद्ध था। क्योंकि आमेर रियासत अपने आप से वैभवशाली तो थी ही साथ ही आमेर घराने के संबंध हिन्दुस्तान के बादशाह अकबर से जुड़े हुए थे। अकबर के दरबार में जयसिंह का ओहदा ऊंचा था और वे अकबर की सेना के प्रधान सेनापति थे। इस कारण अकबर ने उन्हें यह छूट दी हुई थी कि युद्ध में विजित महत्वपूर्ण और बेशकीमती रत्न वे अकबर के कोष में दें और बाकी संपदा अपने पास रखें। इस तरह जयसिंह ने दर्जनों युद्धों से अकूत संपंत्ति एकत्र कर ली। कहा जाता है कि हर बार युद्ध जीतकर जयसिंह आमेर होते हुए ही देश की राजधानी पहुंचा करते थे। इस कारण उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों से महत्वपूर्ण मूर्तियां और अकूत संपदा लाकर आमेर में स्थापित की। इस प्रकार धन-वैभव की कोई कमी नहीं थी आमेर में। लेकिन प्रकृति को संपदा से नहीं जीता जा सकता। लगातार आमेर की जनसंख्या बढ़ रही थी और तीन ओर पहाडि़यों और जंगलों से घिरे इलाके में नगर का विस्तार करना आसान नहीं था। एक चिंता नगर की सुरक्षा को लेकर भी थी। पहाडियों से घिरे राज्य में यदि दुश्मन सेनाएं पहाडियों के शीर्ष तक पहुंचने में कामयाब हो जाती तो कटोरे की आकृति वाले इस नगर की रक्षा करना मुश्किल होता। दूसरी ओर आमेर में जो जलाशय थे वे इतनी विशाल जनसंख्या के लिए जल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में इन अड़चनों के चलते महाराजा सवाई जयसिंह ने विधिवत तरीके से नया शहर बसाने की योजना बनाई। वास्तुविज्ञ विद्याधर भट्टाचार्य ने नए शहर का नक्शा बनाया और 1727 में जयपुर का निर्माण आरंभ हो गया।

पर्यटन का स्वर्ग-आमेर

आमेर अब जयपुर का उपनगर है लेकिन शान शौकत जयपुर के बराबरी की। यहां के महल, दुर्ग, जलाशय, प्राचीन मंदिर और पर्यटन से जुड़ी बहुत सी चीजें देशी विदेशी पर्यटकों का मन मोह लेती हैं। आमेर में आमेर किला,  जयगढ फोर्ट, मावठा, सागर, परियों का बाग, आमेर घाटी, महाराजाओं की छतरियां, पुराने मंदिर और हवेलियां, हाथी गांव और नाहरगढ़ रेस्क्यू आदि मुख्य पर्यटन केंद्र हैं। पर्यटन का कॉमर्शियलाईजेशन होने के बाद ज्यादातर हवेलियों में निजी रिसोर्ट म्यूजियम या शॉपिंग कॉम्प्लेक्स खुल गए हैं।

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आशीष मिश्रा
पिंकसिटी डॉट कॉम

For English: Amber fort (Amer)

Amber fort Gallery

Amber fort in Jaipur in Rajasthan.

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