News Ticker

पांचवां स्तंभ बनता जा रहा है सोशल मीडिया?

पांचवां स्तंभ बनता जा रहा है सोशल मीडिया?

AMIT SHARMAफेसबुक से बहुत-से लोग दुखी हैं। इसलिए कि इस बला ने उनके अपनों को वर्चुअल दुनिया में उलझा दिया है। वे ‘फेस टू फेस’ रिलेशन को भूल ‘फेसबुक’ में उलझ रहे हैं। खुद मैं भी इसका शिकार हूं। जरा ज्यादा देर फेसबुक पर ऑनलाइन हो जाऊं तो श्रीमतीजी जली हुई रोटियां परोसकर सांकेतिक विरोध जता देती हैं। खैर…

सोशल नेटवर्किंग साइट्स कई देशों में प्रतिबंधित हैं। हमारे देश में भी इन पर कैंची चलाने के यदा-कदा प्रयास हुए, जिनका विरोध भी हुआ। लेकिन यह लिखने से चंद मिनट पहले एक ऐसे शख्स से मेरी मुलाकात हुई, जिसकी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी में फेसबुक का बहुत बड़ा योगदान है। जी नहीं, मैं फेसबुक के जरिये बचपन के दोस्तों, बिछड़े हुए प्यार की खोज पूरी होने का उदाहरण नहीं दूंगा। वैसे सनद रहे, मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक की परिकल्पना इसी उद्देश्य से की थी।

मेरी मुलाकात हुई आशीष कुमार चौहान से। आशीष वर्तमान में राजस्थान के सिरोही जिले में एडिशनल ट्रेजरी ऑफिसर हैं और वे हाल ही में आए आईएएस के नतीजों में 181वीं रैंक के साथ सफल हुए। उनके सिलेक्शन में ‘फेसबुक’ का बहुत बड़ा हाथ है। ‘फेसबुक और इंडियन सिविल सर्विसेज में भला क्या कनेक्शन हो सकता है!’ आपके दिमाग में यही सवाल उठ रहा होगा। दरअसल आशीष ने अपने हॉबी वाले कॉलम में मेडिटेशन और फेसबुक लिखा था। जब वे इंटरव्यू देने पहुंचे तो उनसे पूछे गए सवालों में साठ फीसदी प्रश्न ‘फेसबुक’ हॉबी से संबंधित थे। आशीष दो साल पहले भी आईएएस मेन्स क्लीयर कर चुके थे, लेकिन पिछली बार पूछे गए सवाल इतने कठिन और पेचीदगी भरे थे कि उन्हें ‘सॉरी’ कहकर इंटरव्यू छोडऩा पड़ा था। इस बार पैनल में बैठे लोगों ने उनसे फेसबुक के पक्ष-विपक्ष में तकरीबन दस सवाल पूछे। चूंकि आशीष फेसबुक पर सक्रिय थे, इसलिए वे तार्किक अंदाज में जवाब देते चले गए। एक पैनलिस्ट ने चुटकी भी ली कि हम इस सोशल नेटवर्किंग के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते, जबकि वे सबकुछ जानते थे।

बहरहाल आशीष के माध्यम से मुद्दा यह उठता है कि जिन्हें हम तथाकथित टाइमपास करार दे देते हैं, वे चीजें भी जिंदगी बदल सकती हैं। कौन-सी चीज, कब आपके काम आ जाए, कहा नहीं जा सकता। हाल ही अभिषेक मनु सिंघवी वाले मुद्दे पर हमने सोशल मीडिया के नख-दंत भी देख लिए। ‘सत्यमेव जयते’ के पहले एपिसोड में आमिर खान ने बड़ी नजाकत के साथ एक ऐसा मुद्दा हमारे सामने रख दिया, जिस पर चिंतित तो हम सब हैं, पर कर कुछ नहीं रहे। कार्यक्रम की ऑफिशियल साइट पर तो अनगिनत हिट्स आए ही, ट्विटर और फेसबुक पर भी ‘बेटी बचाओ’ मुहिम की लाइन लग गई। कन्या भ्रुण हत्या का काला सच सामने लाने वाले दो पत्रकारों, श्रीपाल शक्तावत और मीना शर्मा को बीते सात सालों में जो टॉर्चर झेलना पड़ा, उसने लोगों की आंखों में आंसू ला दिए। देशभर से लोग ‘सत्यमेव जयते’ को एसएमएस भी कर रहे हैं और राजस्थान के मुख्यमंत्री को चिट्ठी भी लिख रहे हैं। इसके लिए सोशल मीडिया यूजर्स खुद अपील पर अपील कर रहे हैं। सोशल मीडिया ने सांकेतिक रूप से लोकतंत्र के पांचवें स्तंभ का दर्जा अख्तियार कर लिया है।

बात शुरू हुई थी देश की ब्यूरोक्रेसी के उच्चतम पद पर बैठने की जमात में शामिल हुए एक नवयुवक से, जो ऊर्जा से ओत-प्रोत है। हालांकि फेसबुक से जुड़े सवाल न पूछे गए होते तो शायद इस सवाल तक पहुंचने की नौबत नहीं आती, पिछली बार के साक्षात्कार की तरह। चलिए बहुत हुई बातें। अब जरा मैं ऑनलाइन हो जाऊं। आशीष का फ़्रेंडशिप रिक्वेस्ट आया है एफबी पर, उसे कंफर्म कर रहा हूं…!

अमित शर्मा

About Pinkcity.com (2993 Articles)
Our company deals with "Managing Reputations." We develop and research on Online Communication systems to understand and support clients, as well as try to influence their opinion and behavior. We own, several websites, which includes: Travel Portals: Jaipur.org, Pinkcity.com, RajasthanPlus.com and much more Oline Visitor's Tracking and Communication System: Chatwoo.com Hosting Review and Recommender Systems: SiteGeek.com Technology Magazines: Ananova.com Hosting Services: Cpwebhosting.com We offer our services, to businesses and voluntary organizations. Our core skills are in developing and maintaining goodwill and understanding between an organization and its public. We also conduct research to find out the concerns and expectations of an organization's stakeholders.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: