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मुस्लिमों के प्रति सरकार गंभीर नहीं

बिड़ला ऑडिटोरियम में अल्पसंख्यक आरक्षण विषय पर आयोजित सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि सरकारें मुसलमानों के विकास के प्रति गंभीर नहीं हैं। देश का आम मुसलमान शैक्षिक, आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक दृष्टि से लगातार पिछड़ रहा है। मुसलमानों के संपूर्ण विकास का एक ही रास्ता है कि उन्हें आरक्षण दिया जाए। वक्ताओं ने मुस्लिम समुदाय से एकजुटता बनाने की अपील करते हुए कहा कि वे आरक्षण लेकर रहेंगे। संघ ने मांग है कि मिश्रा कमीशन की सिफारिशों के आधार पर मुसलमानों को आरक्षण मिलना चाहिए। सांसद कामरेड मोहम्मद सलीम ने कहा कि बड़ा दुर्भाग्य है कि आजादी के इतने सालों बाद भी मुसलमान अपने हक की लड़ाई लड़ रहा है और वह अपने ही देश में अधिकारों से वंचित है। वरिष्ठ पत्रकार अजीज बर्नी ने कहा कि मुसलमान जिस दिन सही मायने में तय कर लेगा, आरक्षण लेकर रहेगा। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को सूरवाल, गोपालगढ़ कांड में न्याय चाहिए। अजमेर में, मक्का मस्जिद में किसने धमाके करवाए यह किसी से छुपा नहीं है। उन्होंने राजनीतिक पार्टियों को निशाने पर लेते हुए कहा कि कांग्रेस, भाजपा सहित अन्य पार्टियां बस मुसलमानों का वोट चाहती हैं। उन्हें हक देने के लिए कुछ नहीं करना चाहती। पूर्व मंत्री भाजपा के युनूस खान ने कहा कि वे पहले मुसलमान हैं, पार्टी का नंबर बाद में आता है। मुसलमानों की आरक्षण लड़ाई में वे कंधे से कंधा मिलाकर साथ हैं। वक्ताओं ने कहा कि आतंकवाद के नाम पर बेगुनाह मुसलमानों को फंसाना लोकतंत्र पर दाग है। उन्होंने सांप्रदायिक फसाद को रोकने के लिए सांप्रदायिक हिंसा निरोधक विधेयक पास करवाने की मांग की।

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