News Ticker

गुलाबी नगरी के मेले त्‍यौहार

मेले त्‍यौहार

जयपुर मेले-त्‍यौहारों उत्‍सवों का शहर है। यहां परम्‍पराओं के मेले भी लगते हैं तो वहीं सभ्‍यताओं के परिचायक उत्‍सव भी होते हैं। इस शहर की सबसे बडी बात यह है कि यहां तीज गणगौर पर भीड उमडती है तो वहीं वैलेंटाइन डे और मदर्स फादर्स डे पर भी बडे आयोजन होते हैं, यह इस शहर की जिंदादिली का बडा प्रमाण है।

तीज—- तीज का मेला सावन के माह में आयोजित होता है। जुलाई अगस्‍त के महीने में सावन का महीने आता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार पार्वती ने भगवान शिव जैसा पति पाने के लिए वर्षों तपस्‍या की थी। तीज के दिन कन्‍याएं पार्वती को याद कर पूजन करती हैं और शिव जैसे पति की कामना करती हैं। तीज पर शाम को परकोटे में जनानी डयोढी से तीज की सवारी निकलती है। तीज का यह मेला देखने दूर दराज से लोग आते हैं। इसमें शाही लवाजमें के साथ तीज की सवारी निकलती है। इसके अलगे दिन बूढी तीज की सवारी निकलती है। प्राय यह परम्‍परा इसलिए शुरु हुई भीड में बच्‍चे और बुजुर्ग तीज की सवारी नहीं देख पाते थे, इसलिए अगले दिन तीज की सवारी निकाली जाने लगी।

गणगौर–चैत्र शुक्‍ला तृतीया को गणगौर मनाई जाती है। आधुनिक कलेंडर के हिसाब से यह मार्च के महीने में मनाई जाती है। गणगौर का भी जयपुर में मेला भरता है। मिठाई की दुकानों पर घेवर धडल्‍ले से बिकते हैं। यह मिष्‍ठान जयपुर की पहचान है। इस दिन नव सुहागनें विशेष पूजा करती हैं। गणौर के मेले में भी गणगौर की सवारी निकाली जाती है।

जयपुर के पास है चाकसू और चाकूस में है शील की डूंगरी। डूंगरी मतलब छोटी पहाडी। शीतलाष्‍टमी के दिन यहां मेला भरता है। होली के बाद मार्च अप्रेल में शीतला अष्‍टमी आती है। इस दिन बासा खाने का रिवाज है। घरों में तवा नहीं चढता। साइंटिि‍फक नजरिए से देखें तो सही ही है, यह चेतावनी भरा दिन है कि अब आज आखिरी बार बासा खाना खाएं, गर्मियां शुरु हो रही हैं, आज से बासा खाना बंद। 

संकरांत- मकर संक्रांति जयपुर में एक बडा उत्‍सव है। हर साल जनवरी की 14 तारीख को यह त्‍यौंहार मनाया जाता है। सूर्य के मक्‍कर राशी में प्रवेश पर दानपुण्‍य करने की मान्‍यता है। घरों में फीणी और तिल की मिठाइयां खाई जाती हैं। इस अवसर पर पतंग उडाने का गजब का क्रेज जयपुर में देखा जाता है। दिल्‍ली में 15 अगस्‍त और पंजाब में वसंत पंचमी पर पतंग उडती हैं। जयपुर में मकर संक्रांति के दिन पतंग उडाई जाती है।

विरासत उत्‍सव– जयपुर में जनवरी या कभी कभार मार्च के महीने में जयपुर विरासत फाउंडेशन की ओर से लोककलाकारों व अन्‍तरराष्‍ट्रीय कलाकारों के संगम वाला अनूठा आयोजन विरासत उत्‍सव होता आया है। यह विश्‍व मानचित्र में अपनी अगल पहचान बनाने लगा है।

 जयपुर साहित्‍य उत्‍सव- जयपुर शहर साहित्‍य जगत के लिए भी दुनियाभर में एक बडी बहचान बन गया है। यहां डिग्‍गी पैलेस में हर साल जनवरी में टीमवर्क गु्रप की ओर से इंटरनेशनल लिट्रेचर फेस्टिवल का आयोजन होता है। लगातार सात सालों से इस आयोजन ने जयपुर को एक नई पहचान दी है। हाल ही में 2012 का आयोजन वरिष्‍ठ साहित्‍यकार लेखक सलमान रुश्‍दी को लेकर विवादों में रहा। इस फेस्टिवल के आयोजक संजॉय के रॉय दिल्‍ली, मुम्‍बई सिंगापूर में इसी तरह के आयोजन कराते रहते हैं।

जयपुर दिवस समारोह– 18 नवम्‍बर को हर साल जयपुर दिवस समारोह मनाया जाता है। कोई दो दशक पहले जयपुर के कुछ समाज सेवियों ने इसका आयोजन शुरु किया। ि‍फर नगर निगम सालों तक यह आयोजन करने लगा। माली हालत खराब हुई तो कोई चार-पांच सालों तक यह आयोजन नहीं हुआ। इसके बाद राजस्‍थान सरकार की मदद से प्रमोद भसीन और अमित शर्मा की टीम ने यह आयोजन अपने हाथ में लिया।  वर्ष 2009 से इस आयोजन को उस वक्‍त एक नई पहचान मिली जब 24 घंटे नॉन स्‍टॉप जयपुर की ही विधाओं के जरिए जयपुर दिवस समारोह का रिकॉर्ड बनाया गया। यह फेस्टिवल भी अब जयपुर में पहचान बना रहा है।

कथा रंग- साहित्‍य जगत के एनुअल कलेंडर में अब कथा रंग का नाम शुमार है। जयपुर के व्‍यंगकार और नाटयकर्मी अशेक राही की संस्‍था पीएमटी की ओर से हर साल नवम्‍बर दिसम्‍बर माह में तीन दिन के फेस्टिवल कथारंग का आयोजन होता है। दुनिया के महान कहानीकारों की रचनाओं पर जयपुर के रंगकर्मी अभिनय करते नजर आते हैं। तीन दिन जयपुर में साहित्‍य की सांझ सजती है।

लोकरंग- जयपुर के जवाहर कलाकेन्‍द्र की ओर से हर साल देशभर के लोककलाकारों को मंच देने के लिए लोकरंग का आयोजन होता है। इसमें बारह तेहर प्रदेशों के कलाकार भागीदारी देते हैं। अक्‍टूबर में यह आयोजन जवाहर कला केन्‍द्र के ओपन थिएटर में होता है। जिसमें दर्शकों का सैलाब सा आ जाता है।

काइट फेस्टिवल- विदेशी सैलानियों के लिए यह भव्‍य आयोजन होता है। प्राय मकर संक्रांति यानी की 14 जनवरी के दिन ही यह आयोजन राजस्‍थान के पर्यटन विभाग की ओर होता है। इसमें बाबू भाई पतंग वाले अपनी नायाब पतंगे आसमान में उडाते हैं।  बाबू भाई पूरी दुनिया अपनी पतंगों के साथ घूम चुके हैं। पहले यह आयोजन परकोटे में स्थित चौगान स्‍टेडियम में होता था अब यह जलमहल की पाल पर होने लगा है।

एलीफेंट  फेस्टिवल– विदेशी पावणों को जयपुर में हाथी की सवारी बहुत भाती है। आप जब भी यहां आएं, आमेर में हाथी की सवारी का लुत्‍फ उठा सकते हैं। इस पसंदगी को पर्यटन विभाग एलिफेंट फेस्टिवल के जरिए और निखारता है।  जयपुर में मार्च के महीने में होली के दिन एलीफेंट फेस्टिवल होता है। जिसमें गजराज तरह तरह के करतब दिखाते हैं।

Best Web Hosting Providers

Liquid Web

Website Hosting, Server Hosting: Cloud, Dedicated Server, HIPAA Server, and Word Press plans, within a fully managed environment

A2Hosting

Website Hosting, Server Hosting: Cloud, Dedicated Server, HIPAA Server, and Word Press plans, within a fully managed environment

Greengeeks

Website Hosting, Server Hosting: Cloud, Dedicated Server, HIPAA Server, and Word Press plans, within a fully managed environment

Namecheap

Website Hosting, CDN Service, Server Hosting Domains, SSL certificates, hosting

InMotion Hosting

Website Hosting

Hostgator

Website Hosting - shared, reseller, VPS, & dedicated hosting solutions

Hostens

Website HostingServer HostingB2B

jetpack

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: